लापता बच्चों के मामले पर SC सख्त, केंद्र से पूछा, क्या देश में इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली: देश के अलग अलग  हिस्सों से बच्चों के लापता होने के लगातार बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से गंभीर और अहम सवाल पूछे। कोर्ट ने  केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई संगठित और देशव्यापी नेटवर्क काम कर रहा है या फिर ये केवल अलग-अलग राज्यों में घटने वाली बिखरी हुई घटनाएं हैं।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि यह जानना बेहद जरूरी है कि बच्चों के लापता होने के मामलों में कोई समान पैटर्न है या नहीं। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित आंकड़े एकत्र कर उनका समुचित विश्लेषण करे, ताकि पूरे मामले की सही तस्वीर सामने आ सके।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने साफ शब्दों में कहा, “हम जानना चाहते हैं कि क्या बच्चों के लापता होने के पीछे कोई राष्ट्रीय नेटवर्क है या फिर राज्य-स्तरीय गिरोह सक्रिय हैं। क्या यह कोई पैटर्न है या केवल संयोग?” अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि जिन बच्चों को अब तक बचाया जा चुका है, उनसे पूछताछ कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि इन घटनाओं के पीछे कौन लोग और संगठन जिम्मेदार हैं।अदालत ने डेटा साझा नहीं करने वाले राज्यों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि कुछ राज्यों ने डेटा दे दिया है, लेकिन करीब एक दर्जन राज्य अब भी जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि डेटा न देने वाले राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं. कोर्ट का मानना है कि जब तक पूरे देश का डेटा एक साथ नहीं आता, तब तक इस समस्या की जड़ तक पहुंचना मुमकिन नहीं है. सरकार को निर्देश दिया गया है कि पिछले 6 सालों का पूरा ब्योरा कंपाइल कर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।

News 7
Author: News 7

Leave a Comment

और पढ़ें

Orpheus Financial