उत्तराखंड: रुड़की में पिरान कलियर में पंजाब के जगराओं से आए जायरीनों के एक जत्थे ने विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में 90 हजार रुपए की बनी 60 फीट लंबी नोटों की चादर और फूल पेश कर देश में अमनो-अमान और खुशहाली की दुआ मांगी. इतना ही नहीं, बल्कि उनके द्वारा चार दिनों तक लंगर का आयोजन कर गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन भी कराया गया.
पिरान कलियर में पिछले 18 वर्षों से आशिके साबिर क्लब जगराओं की और से निःशुल्क लंगर चलाया जाता है. इस बार भी जगराओं आए 150 जायरीनों के एक जत्थे ने 4 दिवसीय निःशुल्क लंगर चलाया है. इस दौरान जत्थे में शामिल जायरीनों ने गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन भी कराया. इतना ही नहीं, बल्कि पंजाब के जगराओं निवासी विक्की प्रधान के नेतृत्व में आए जत्थे ने विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक और दरगाह इमाम साहब में 60 फीट लंबी 90 हजार रुपए के नोटों से बनी चादर भी पेश की है।
जत्थे का नेतृत्व कर रहे विक्की प्रधान ने बताया कि उनका ये जत्था हर साल सैकड़ों जायरीनों के साथ जगरांव से पिरान कलियर शरीफ पहुंचता है और दरगाह साबिर पाक में चादर पेश कर देश में अमन-शांति और खुशहाली की दुआ करता है. उन्होंने बताया कि हर वर्ष जत्थे की ओर से चार दिनों तक लंगर का आयोजन भी किया जाता है. जिसमें गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराया जाता है.
विक्की प्रधान का कहना है कि हजरत साबिर पाक ने इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम दिया है. इस कारण सभी श्रद्धालु दरगाह में गहरी आस्था रखते हैं. विक्की प्रधान ने बताया कि 150 लोगों का ये जत्था कलियर पहुंचकर पहले लोगों की सेवा करता है.
पिरान कलियर सूफी संतों की नगरी कहलाता है. क्योंकि यहां विश्व प्रसिद्ध सूफी हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक की दरगाह है. दरगाह से अकीदत और सच्ची मोहब्बत रखने वाले लोग यहां आते है और अपनी बिड़गी बनाते हैं. कहते हैं कि दरबार में सच्चे दिल से जो मांगा जाता, वो उसे हासिल होता है. दरबार-ए-साबिर पाक का प्रत्येक वर्ष सालाना उर्स मनाया जाता है. उर्स में देश विदेश से जायरीन अपनी मुरादें लेकर लाखों की संख्या में पहुंचते हैं और अकीदतमंद दरबार में हाजिरी लगाते हैं.










