श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के कटरा में वैष्णो देवी मंदिर के पास भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन में 30 लोगों की मौत हो गई है. भूस्खलन वैष्णो देवी मंदिर के मार्ग पर स्थित अधक्वारी गुफा मंदिर में इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुआ है. इस बात की जानकारी रियासी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमवीर सिंह ने दी. वहीं, जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने गंभीर तबाही मचाई है.
अर्धकुमारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास भूस्खलन की घटना हुई है. वहीं, कुछ लोगों के घायल होने की भी आशंका है. बचाव कार्य लगातार जारी है. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “जय माता दी। भूस्खलन और लगातार बारिश के कारण क्षेत्र में रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं. जानकारी के मुताबिक मृतकों में सात श्रद्धालु भी शामिल हैं. हालात को देखते हुए वैष्णो देवी यात्रा को स्थगित कर दिया गया है, जबकि राज्य भर में संचार, परिवहन और शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
वैष्णो देवी यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि तीर्थयात्रा को अगली सूचना तक निलंबित कर दिया गया है. बोर्ड ने श्रद्धालुओं से मौजूदा खराब मौसम को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा योजनाओं को पुनः निर्धारित करने की अपील की है.
भारी वर्षा से सड़कों और हाईवे पर आवागमन ठप
बारिश के कारण श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर रामबन जिले में भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं के चलते आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है. डोडा और किश्तवाड़ के बीच NH-244 का एक हिस्सा बह जाने से यह मार्ग भी बंद हो गया है. वहीं, भारी बर्फबारी के कारण ज़ोजिला दर्रा बंद हो गया है, जिससे श्रीनगर-लेह मार्ग पर भी यातायात प्रभावित हुआ है. किश्तवाड़-सिंथन-अनंतनाग मार्ग, मुगल रोड और श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी मार्ग भी भूस्खलन की वजह से बंद कर दिए गए हैं.
भारतीय सेना और NDRF का राहत अभियान जारी
भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में मानवता सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियान चला रही हैं. आरएस पुरा में विश्वविद्यालय में फंसे छात्रों और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया. कठुआ जिले में, हेलीकॉप्टरों की सहायता से रावी नदी के बढ़ते जल स्तर में फंसे ग्रामीणों को एयरलिफ्ट किया गया. मकौरा गांव में 70 से अधिक लोगों को नावों के ज़रिए सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया.











