एसिड अटैक मामलों की पेंडेंसी पर SC सख्त; कहा, क्यों न पीड़िता की मदद के लिए आरोपी की संपत्ति जब्त की जाए

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देश में एसिड अटैक के मामलों को निपटाने में हो रही देरी, हर राज्य में सैकड़ों केस के पेंडिंग होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पीड़ितों को सही मुआवजा दिलाने के लिए आरोपियों की संपत्ति नीलाम/जब्त करने जैसे कठोर कदम उठाने का सुझाव दिया है.

बेंच ने एक PIL की सुनवाई करते हुए यह बात कही. पीआईएल में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पहले तय की गई गाइडलाइंस को लागू करने की मांग की गई थी. इस पीआईएल के सापेक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई स्टेटस रिपोर्ट में अकेले उत्तर प्रदेश में 198 केस पेंडिंग बताए गए. जबकि, गुजरात में 114, पश्चिम बंगाल में 60, बिहार में 68 और महाराष्ट्र में 58 केस पेंडिंग हैं.

सर्वोच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि एसिड हमले के मामलों में अधिक कठोर दंड लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा विधायी हस्तक्षेप आवश्यक हो सकता है. सीजेआई ने निवारण को लेकर भी चिंता व्यक्त की और सुझाव दिया कि पीड़ित को मुआवजा देने के लिए आरोपी की संपत्ति जब्त की जाए.

कैसे रुकेंगे एसिड अटैक के मामले: एक रिपोर्ट के अनुसार 2009 के शाहीन मलिक एसिड हमले के मामले में आरोपियों को बरी कर दिया गया था. कड़े कानूनों के बावजूद कमजोर विवेचना और कम दोषसिद्धि दर के कारण आरोपी छूट जाते हैं. हमले रोकने के लिए एसिड की बिक्री का सख्त नियमन, त्वरित अदालती कार्यवाही और पीड़ितों को समय पर मुआवजा देना महत्वपूर्ण है. एसिड हिंसा को समाप्त करने के लिए पीड़ित केंद्रित न्याय और पुनर्वास आवश्यक है.

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Author: News 7

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