नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आज राष्ट्र के नाम संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने किसानों, देश के जवानों और वैज्ञानिकों के बारे में बात की है।
उन्होंने कहा कि देश के किसान अन्न पैदा करके देश की सच्ची सेवा कर रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, ‘हम भारत के लोग, देश और विदेश में पूरे जोश के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में हमारे देश की स्थिति और दिशा पर सोचने का मौका देता है।’
उन्होंने कहा, ‘हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की शक्ति ने 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश की स्थिति बदल दी। भारत आज़ाद हुआ। हम अपने राष्ट्रीय भाग्य के निर्माता बने। 26 जनवरी, 1950 से हम अपने गणतंत्र को अपने संवैधानिक आदर्शों की ओर बढ़ा रहे हैं। उस दिन हमारा संविधान पूरी तरह से लागू हुआ।’
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य का मूलभूत दस्तावेज़ है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्श हमारे गणराज्य को परिभाषित करते हैं। संविधान निर्माताओं ने संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना और देश की एकता के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान किया।’










