कर्नाटक में सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव, भाषण बिना पढ़े सदन से चले गए गवर्नर, सीएम सिद्धारमैया बोले -ये लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन

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केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में कर्नाटक सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र के कारण राज्यपाल और सरकार के बीच विवाद खड़ा हो गया है. इस बात पर संदेह था कि राज्यपाल थावर चंद गहलोत विधानसभा सत्र को संबोधित करने आएंगे या नहीं. हालांकि, राज्यपाल विधानसभा में आए और सरकार के भाषण की पूरी प्रति पढ़े बिना ही चले गए.

राज्यपाल ने सदन में हिंदी में सिर्फ इतना पढ़ा, ‘मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक और भौतिक विकास को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक।’कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने राज्यपाल को रोकने की कोशिश की। वहीं दूसरे कांग्रेस विधायकों ने जमकर नारेबाजी की।

सत्ताधारी दल के विधायकों ने इसका कड़ा विरोध किया और नारे लगाए. इस दौरान सदन में जमकर हंगामा मचा, हालांकि बाद में सीएम सि्दधारमैया ने बयान जारी कर इसे लोकतंत्र का काला दिन करार दिया.

इससे पहले राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार भाषण से 11 बिंदुओं को हटाने का सुझाव दिया था. हालांकि, सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया. इसलिए, यह कहा जा रहा था कि राज्यपाल का भाषण देने आना संदिग्ध है.

सरकार की उम्मीदों के विपरीत राज्यपाल विधानसभा में आए और अपना भाषण शुरू किया. उन्होंने सरकार द्वारा तैयार भाषण के पहले और आखिरी पैराग्राफ की कुछ पंक्तियां ही पढ़ीं और फिर वे चले गए.

राज्यपाल के जाते समय एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने उन्हें रोकने की कोशिश की. कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के विरुद्ध नारे लगाए. इस दौरान विधानसभा में अफरा-तफरी मच गई. .

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Author: News 7

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