दावोस : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के पहले ग्रुप की औपचारिक घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा कि बोर्ड ऑफ पीस दुनिया में शांति स्थापित करने का काम करेगा, लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र की जगह नहीं लेगा. उन्होंने कहा कि हम यूएन के साथ-साथ अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेंगे.
ट्रंप ने जो बोर्ड ऑफ पीस बनाया है, उनमें 20 सदस्य हैं. इनके नाम हैं – अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, मोरक्को, बहरीन, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, जॉर्डन, कोसोवो, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, मंगोलिया, उजबेकिस्तान और पराग्वे. इसकी घोषणा के दौरान अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो, पराग्वे के रूढ़िवादी राष्ट्रपति सैंटियागो पेना, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव शामिल थे.
ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान के संघर्ष का जिक्र किया और कहा कि पिछले कुछ समय में हमने कुल आठ युद्ध रोके हैं. उन्होंने रूस-यूक्रेन का जिक्र करते हुए कहा कि हम इसे सबसे आसान समझ रहे थे, लेकिन ये संभवतः सबसे मुश्किल जंग साबित होने वाली है. पिछले महीने 29 हजार लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर सैनिक थे. उससे पहले के महीनों में भी हजारों सैनिक इस जंग की भेंट चढ़ गए. ये बहुत खौफनाक है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हम गाजा में बहुत सफल होने वाले हैं. यह सुनिश्चित करेंगे कि गाजा को गैर-सैन्यीकृत किया जाए और खूबसूरती से फिर से बनाया जाए.” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने गाजा में संघर्ष विराम बनाए रखा, रिकॉर्ड स्तर की मानवीय सहायता पहुंचाई और अब गाजा में फिलिस्तीनियों के भूखे रहने की कोई खबर नहीं आती है.
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया था, तब से तुलना करें तो आज की दुनिया अधिक अमीर, अधिक सुरक्षित और बहुत ज्यादा शांतिपूर्ण है. ट्रंप ने उन आठ वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का दावा किया, जिसके बारे अक्सर वह अलग-अलग मंचों से दावा करते रहते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सूची में अगला नंबर हिज्बुल्लाह और लेबनान की लड़ाई का है. ट्रंप ने कहा कि वे उसे भी सुलझा देंगे. उन्होंने कहा, “हमें इसके बारे में कुछ करना होगा.”
संयुक्त राष्ट्र पर तंज कसते हुए ट्रंप ने कहा कि इसमें जबरदस्त पोटेंशियल है, लेकिन मैंने यूनाइटेड नेशंस से उन आठ कॉन्फ्लिक्ट्स में से किसी के बारे में बात नहीं की, जिन्हें मैं ठीक करना चाहता था. उन्होंने कहा कि एक साल में उन्होंने इतना काम किया, इतिहास में किसी ने भी इतना काम नहीं किया होगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुलंदियों तक पहुंचा दिया.
इस मौके पर ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने कहा, “शुरुआती इजराइल-गाजा सीजफायर डील साइन होने के बाद सभी खुशी मना रहे थे. अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और मैं घबरा रहे थे, सोच रहे थे, अब आगे क्या करें? हम शांति कैसे लागू करें?जैसा कि आप लोग जानते हैं, शांति एक बिजनेस डील से अलग चीज है, क्योंकि आप लोगों की सोच बदल रहे होते हैं. गाजा शांति प्रयास बहुत एंटरप्रेन्योरियल था. हमें सोचना था कि हम आगे क्या करें, आदतों को कैसे बदलें, व्यवहार को कैसे बदलें?”
जेरेड कुशनर ने गाजा में बोर्ड ऑफ पीस के डेवलपमेंट प्लान के बारे में और ज्यादा डिटेल्स दिया, लेकिन फिलिस्तीनी देश की तरफ बढ़ने के रास्ते के प्लान का जिक्र नहीं किया.कुशनर ने कहा, “सबसे जरूरी चीज सिक्योरिटी होगी – जाहिर है, हम इजराइलियों के साथ मिलकर तनाव कम करने का रास्ता निकालने के लिए बहुत करीब से काम कर रहे हैं, और अगला फेज हमास के साथ मिलकर डीमिलिटराइजेशन पर काम करना है.”
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ट्रंप शांति की तलाश में किसी से भी बात करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, “हम आज यहां राष्ट्रपति ट्रंप के विजन की वजह से हैं. कुछ महीने पहले, लोगों को लगता था कि इसे हल करना नामुमकिन है. गाजा में रखे गए बंधकों के बारे में किसी ने नहीं सोचा था कि इसका कोई समाधान निकलेगा. लेकिन ट्रंप में असंभव को सच करने का विजन और हिम्मत है.”










