नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया के युद्ध को ‘कोरोना महामारी’ जैसा ही एक अप्रत्याशित वैश्विक संकट करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर लंबे समय तक रहने वाला है और इससे पार पाने के लिए देशवासियों को उसी तरह तैयार और एकजुट रहना होगा, जैसे सबने मिलकर कोरोना का सामना किया था। प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर भाषण दे रहे थे।
पीएम ने कहा, “इस जंग के कारण दुनिया में बने हालात का असर लंबे समय तक रहने की आशंका है। इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है. धीरज, संयम और शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है, यही हमारी पहचान है।
पीएम ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, गैस और उर्वरक से लदे जहाजों के आवागमन में चुनौती के बावजूद सरकार का प्रयास देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बहुत अधिक प्रभावित नहीं होने देने का है। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और पेट्रोल-डीजल की लगातार सुचारू आपूर्ति पर काम किया गया है। प्रधानमंत्री ने कृषि संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में कहा कि सरकार किसानों की हरसंभव मदद करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ भारत के व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है और देश में कच्चे तेल तथा गैस के बड़े हिस्से की आपूर्ति करता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के हालात से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था, लोगों के जीवन पर बहुत विपरीत असर हो रहा है. भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे संकट के समय देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा भारत की बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है। मोदी ने कहा, “युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक लगभग एक हजार भारतीय सुरक्षित वापस आए हैं। इनमें मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 700 से अधिक युवा हैं।










