अमेरिका के राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत का दावा किया, कहा- ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का यह सबसे बड़ा मौका है. वहीं, ईरान ने दावा को ‘झूठा’ बताकर खारिज किया है.
- ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा है, “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक ख़ामेनेई अब मर चुके हैं.”
ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका के बेहद मॉडर्न इंटेलिजेंस और ट्रैकिंग सिस्टम से खामेनेई नहीं बच पाए। इस बड़े ऑपरेशन को अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर अंजाम दिया। ट्रंप के अनुसार, इस अटैक में खामेनेई के साथ-साथ कई अन्य टॉप ईरानी नेता भी मारे गए और वे बचने के लिए कुछ नहीं कर पाए।
इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमले किए. मिनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. ईरानी मीडिया के अनुसार, देश भर में इन हमलों में अब तक 200 से अधिक लोग मारे गए हैं. हमलों के दौरान तेहरान और अन्य शहरों में धमाके सुने गए और हवाई हमलों के सायरन बजाए गए.
ईरान ने इसका जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र के देशों — सऊदी अरब, कतर, कुवैत, यूएई, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. एयर इंडिया और इंडिगो ने इस तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रोक दिया है. इजराइल ने अपने एयरस्पेस को आम उड़ानों के लिए बंद कर दिया है.
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का विकल्प दिया था, लेकिन ईरान ने केवल परमाणु हथियार बनाने में रुचि दिखाई. इससे अमेरिका और इजराइल ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया. यह युद्ध खाड़ी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तनाव बढ़ा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र में इजरायली राजदूत डैनी डैनन ने ईरान पर हुए हमलों को “अस्तित्व बचाने की जरूरत” बताया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर किया गया यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु खतरे और आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए था. डैनन ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई ईरानी जनता से नहीं, बल्कि “हत्यारे शासन” से है. ट्रंप के दावों के बीच इजरायल ने साफ कर दिया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे.










