बेंगलुरु: खादी को बढ़ावा देने और खादी उद्योग को सपोर्ट करने के उद्देश्य से, कर्नाटक सरकार ने अपने पांच लाख कर्मचारियों को हर महीने के पहले शनिवार को खादी से बने कपड़े पहनने का निर्देश दिया है.
यह नया नियम सिविल सर्विस डे यानी की 21 अप्रैल से लागू होगा. यह नियम राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों पर लागू होगा, जिनमें अलग-अलग बोर्ड और कॉर्पोरेशन, यूनिवर्सिटी, अलग-अलग अथॉरिटी और मदद पाने वाले इंस्टिट्यूट में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं.
इस बारे में फैसला गुरुवार को यहां मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और कर्नाटक स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉईज एसोसिएशन (KSGEA) के पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक में लिया गया.
कर्नाटक स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉईज एसोसिएशन के अध्यक्ष सीएस शदाक्षरी ने कहा कि, खादी के कपड़े पहनना जरूरी नहीं है, बल्कि अपनी मर्जी से है. उन्होंने बताया कि, खादी का कपड़े पहनने के लिए सरकारी कर्मचारियों को इसलिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि, दिक्कतों का सामना कर रहे खादी उद्योग के बुनकरों को राहत मिले. इसलिए सरकार की अपील पर अमल किया जा रहा है.
पहले, सरकार राज्य सरकार के कर्मचारियों को हर शुक्रवार को खादी पहनने के लिए कहने पर विचार कर रही थी, लेकिन कर्मचारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को देखते हुए इसे महीने में एक दिन तक सीमित करने का फैसला किया गया.
KSGEA की प्रेस रिलीज के मुताबिक, पुरुष कर्मचारी खादी से बने पैंट, शर्ट और ओवरकोट पहन सकते हैं और महिला कर्मचारी साड़ी और चूड़ीदार पहन सकती हैं.
कर्मचारियों से कहा गया है कि वे ड्रेस मटीरियल जरूरी तौर पर सरकार द्वारा चलाई जाने वाली खादी ग्रामोद्योग मंडलियों की दुकानों से खरीदें. ऐसी खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने हर खरीदारी पर 5 प्रतिशत एक्स्ट्रा डिस्काउंट देने की घोषणा की है.
कर्नाटक पुलिस को कैजुअल लीव मिलेंगी
वहीं, दूसरी तरफ लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए, कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को पुलिस कर्मचारियों के लिए कैजुअल लीव यानी की आकस्मिक छुट्टियों की घोषणा की.
कर्नाटक के डीजीपी एमए सलीम ने गुरुवार को एक सर्कुलर जारी करके सभी पुलिस यूनिट के हेड और पुलिस स्टेशन के इंचार्ज को निर्देश दिया कि आग्रह करने पर वे अपने अंडर काम करने वाले पुलिस कर्मचारियों के लिए कैजुअल लीव मंजूर करें.










