भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी, 2026 को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) साइन करने की घोषणा की है। जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” (Mother of All Deals) कहा जा रहा है। यह समझौता वैश्विक व्यापार में अमेरिकी संरक्षणवाद और टैरिफ नीतियों के बीच भारत और यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक कदम है, जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति के लिए एक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
इस सौदे के लिए बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, यह दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के सफल नतीजे का प्रतीक है। लगभग 18 साल बाद पूरी हुई है।समझौते के तहत, यूरोपीय संघ को निर्यात किए जाने वाले लगभग 97% भारतीय सामानों पर और भारत को निर्यात किए जाने वाले लगभग 96.6% यूरोपीय संघ के सामानों पर टैरिफ या तो खत्म कर दिए जाएंगे या काफी कम कर दिए जाएंगे।
इंडिया एनर्जी वीक 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। उन्होंने कहा, “यह समझौता भारत और यूरोप के लोगों के लिए बड़े अवसर लाएगा। यह दुनिया की 2 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह समझौता ग्लोबल GDP का 25 प्रतिशत और ग्लोबल ट्रेड का 1/3 हिस्सा है।”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ दोनों की बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक प्रासंगिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता उद्योग के फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा, “मैं इस क्षेत्र से जुड़े साथियों को भी बधाई देता हूं। यह समझौता आपके लिए बहुत मददगार होगा।”
पीएम मोदी ने कहा कि इस व्यापार समझौते का देश में मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, “दोस्तों, यह व्यापार समझौता ना केवल भारत में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करेगा, बल्कि सेवा क्षेत्र के और विस्तार का भी मार्ग प्रशस्त करेगा।” व्यापक वैश्विक प्रभाव पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि FTA भारत में वैश्विक विश्वास को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, “यह मुक्त व्यापार समझौता दुनिया भर के व्यवसायों और निवेशकों के लिए भारत में वैश्विक विश्वास को और मजबूत करेगा।”
इसे व्यापार जगत की सबसे बड़ी संधियों में से एक माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर भारतीय ऑटो बाजार और उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। इस समझौते के तहत यूरोपीय कारों पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स में बड़ी कटौती की गई है, जिससे भारत में लग्जरी गाड़ियों की कीमतें कम होने का रास्ता साफ हो गया है।










