‘हलफनामा दें या देश से माफी मांगे’, राहुल गांधी के आरोपों पर ECI की प्रतिक्रिया

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली: चीफ इलेक्शन कमीश्नर ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों के जवाब में रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कहा कि SIR की कवायद को लेकर कुछ लोग जनता को गुमराह कर रहे हैं.

ECI पर राहुल गांधी के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “…या तो हलफनामा देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी. कोई तीसरा विकल्प नहीं है. अगर 7 दिनों के अंदर हलफनामा नहीं मिलता है, तो इसका मतलब है कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं…”

‘एक भी मतदाता का नाम प्रमाण के साथ नहीं मिला’
उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को लेकर कहा, आरोप लगे कि महाराष्ट्र में मतदाता सूची में संख्या बढ़ गई है. जब ड्राफ्ट सूची थी, तो दावे और आपत्तियां समय पर क्यों नहीं जमा की गईं? जब नतीजे आए, तब कहा गया कि ये गलत है. आज तक महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी को एक भी मतदाता का नाम प्रमाण के साथ नहीं मिला है. चुनाव हुए आठ महीने हो गए हैं…

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ये भी पूछा गया कि आखिरी एक घंटे में इतनी वोटिंग कैसे हुई? चुनाव आयोग ने जवाब दिया था कि अगर 10 घंटे मतदान होता है, तो औसत हर घंटे 10 प्रतिशत होता है… किसी भी बात को 10 बार, 20 बार कहने से वो सच नहीं हो जाता. सूरज सिर्फ़ पूर्व में उगता है. किसी के कहने से वो पश्चिम में नहीं उगता.

वोटर लिस्ट में सुधार आयोग की कानूनी जिम्मेदारी;
उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में सुधार चुनाव से पहले होना चाहिए या बाद में? चुनाव आयोग ऐसा नहीं कह रहा है. जनप्रतिनिधित्व कानून कहता है कि आपको हर चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में सुधार करना होगा. यह चुनाव आयोग की कानूनी जिम्मेदारी है.”

ज्ञानेश कुमार ने आगे कहा कि इसके बाद सवाल उठता है कि क्या चुनाव समिति बिहार के सात करोड़ से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंच पाएगी? सच तो यह है कि यह काम 24 जून को शुरू हुआ था. पूरी प्रक्रिया लगभग 20 जुलाई तक पूरी हो गई थी…”

डुप्लीकेट EPIC को लेकर क्या बोले मुख्य चुनाव आयुक्त?
वहीं , डुप्लीकेट EPIC को लेकर मुख्य चुनाव ने कहा, “डुप्लीकेट EPIC दो तरह से हो सकता है. एक तो यह कि एक व्यक्ति जो पश्चिम बंगाल में है, उसके पास एक ईपीआईसी नंबर है और दूसरा व्यक्ति जो हरियाणा में है, उसके पास भी वही ईपीआईसी नंबर है. जब मार्च 2025 के आसपास यह सवाल आया, तो हमने इस पर चर्चा की और हमने पूरे देश में इसका समाधान किया.”

उन्होंने बताया कि करीब तीन लाख ऐसे लोग मिले, जिनके ईपीआईसी नंबर एक जैसे थे, इसलिए उनके ईपीआईसी नंबर बदल दिए गए. दूसरे तरह का डुप्लीकेशन तब आता है जब एक ही व्यक्ति का नाम एक से ज़्यादा जगहों पर वोटर लिस्ट में होता है और उसका ईपीआईसी नंबर अलग-अलग होता है.

किसी भी राजनीतिक दल ने आपत्ति दर्ज नहीं करवाई
चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने कहा, “…1 अगस्त के बाद, जब से हमारे दैनिक बुलेटिन आने शुरू हुए हैं, किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है. इसलिए, इसका अर्थ है मसौदा सूची पूरी तरह से सही है… चुनाव आयोग कह रहा है कि हम 1 सितंबर तक का समय देंगे और इसे (मसौदा सूची) ठीक किया जा सकता है…”

उन्होंने पूछा कि अगर 1 सितंबर के बाद भी इसी तरह के आरोप लगाए जाते हैं, तो कौन ज़िम्मेदार है? हर मान्यता प्राप्त दल के पास अभी भी पंद्रह दिन बाकी हैं… मैं आपके माध्यम से अपील करता हूं कि सभी बारह राजनीतिक दल, चाहे वे राष्ट्रीय दल हों या राज्य स्तरीय दल, 1 सितंबर से पहले (मसौदा सूची) में गलतियों को इंगित करें. चुनाव आयोग उन्हें ठीक करने के लिए तैयार है…”

 

News 7
Author: News 7

Leave a Comment

और पढ़ें

Orpheus Financial