देहरादून। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था 1 जुलाई से पूरी तरह बदलने जा रही है। 30 जून 2026 के साथ ही उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और इसके बाद राज्य के सभी पंजीकृत मदरसे राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण के अधीन आ जाएंगे। नई व्यवस्था लागू होने में अब केवल चार दिन शेष हैं और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हजारों छात्रों की पढ़ाई को बिना बाधा जारी रखना है।
सरकार का उद्देश्य मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ते हुए एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करना है, ताकि छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और अन्य आधुनिक विषयों की भी शिक्षा मिल सके। हालांकि कई मदरसा संचालक अभी भी नई व्यवस्था को लेकर असमंजस में हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। इनमें अध्ययनरत छात्रों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2024 में यह संख्या 70 हजार से अधिक बताई गई थी, जबकि वर्ष 2026 की रिपोर्ट में 40 हजार से अधिक छात्रों का उल्लेख किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत सभी मदरसों को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण से पंजीकरण कराना होगा। विभाग के अनुसार कई संस्थानों ने आवश्यक दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि कुछ मदरसे अभी भी निर्णय की स्थिति में नहीं हैं।
सरकार के सामने दूसरी बड़ी चुनौती लगभग 500 अपंजीकृत मदरसों की है। पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान सरकार ने इनके खिलाफ अभियान चलाते हुए बड़ी संख्या में अवैध मदरसों को सील किया है। अब 1 जुलाई के बाद शेष अपंजीकृत संस्थानों पर क्या कार्रवाई होगी, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।
हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और देहरादून जिले, जहां सबसे अधिक मदरसे संचालित हैं, नई व्यवस्था के केंद्र में रहेंगे। प्रशासन इन जिलों में विशेष निगरानी और निरीक्षण करेगा।
एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने के साथ प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है। कई मदरसों में विज्ञान और गणित जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
सरकार का कहना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। परीक्षा, प्रमाणपत्र और पंजीकरण जैसी सभी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाएगा।
विशेष सचिव अल्पसंख्यक विभाग पराग मधुकर ने कहा कि मदरसा बोर्ड भंग होने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और मदरसों के पास पंजीकरण के लिए पर्याप्त समय है।
वहीं, अल्पसंख्यक विभाग की निदेशक दीप्ति सिंह ने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार पूरी तैयारी के साथ नई व्यवस्था लागू कर रही है और पंजीकरण की प्रक्रिया भी लगातार जारी है।
अब 1 जुलाई से उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था का नया अध्याय शुरू होगा। नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।









