दिल्ली में NEET और झारखंड में JPSC पेपर लीक विवाद के बीच पंजाब में भी कथित पेपर लीक का मामला काफी गर्माया था। परीक्षा में हुई नक़ल के कारण पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने 17 सितंबर तक रोक लगा दी है। परीक्षा के बाद इसमें नकल और पेपर लीक के आरोप लगे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया।
हाई कोर्ट ने ये फैसला जुलाई 2026 में हुई परीक्षा में पेपर लीक और हाई-टेक नकल के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज फरीदकोट द्वारा 19 जुलाई को परीक्षा आयोजित की गई थी।
इस दौरान पुलिस ने हाई-टेक गैजेट से नकल कराने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था जिसके बाद परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दायर कर इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने और नए सिरे से पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराने की मांग की थी।
दरअसल परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल कर नकल करते पकड़ा गया था। परीक्षा में हाईटेक चीटिंग और पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद अभ्यर्थियों में आक्रोश है। छात्रों और छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए लगातार प्रदर्शन किए गए।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का यह आदेश भगवंत मान सरकार के लिए किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि सरकार की ओर से यही दावा किया जा रहा था कि पेपर लीक नहीं हुआ है, लेकिन पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से यह तय हो गया है कि पेपर लीक हुआ था।
वहीं इस मुद्दे पर बीजेपी ने पंजाब सरकार पर हमला किया। बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि जब पेपर लीक हुआ था तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बार-बार कहा था कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ था। ये दिखाता है कि चाहें कांग्रेस पार्टी हो या आम आदमी पार्टी हो, उनके दोहरे मानदंड हैं।









