नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को नक्सलवाद की समस्या का जवाब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिया। उन्होंने कहा कि देश में नक्सलवाद की समस्या लगभग समाप्त हो गई है और मोदी सरकार ने अपना वादा पूरा किया। अमित शाह ने देश में नक्सलवाद पनपने के लिए कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा को जिम्मेदार ठहराते हुए सोमवार को लोकसभा में कहा कि देश अब नक्सल मुक्त हो गया है।
विभिन्न राज्यों में नक्सलवाद के खिलाफ चलाये गए अभियानों की सफलता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसा कह सकते हैं कि हम नक्सल मुक्त हो गए हैं।”
सरकार ने देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा निर्धारित की थी।जिसे मोदी सरकार ने अपना वादा पूरा कर दिया।
अमित शाह ने करीब डेढ़ घंटे के अपने भाषण के दौरान, वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयासों पर नियम 193 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘‘कई सुरक्षा विशेषज्ञ कहते थे कि सत्ता के समर्थन के बिना किसी हथियारबंद आंदोलन का देश के बीचोंबीच ‘रेड कॉरिडोर’ बनना संभव नहीं है।’’
शाह ने कहा,2014 में सरकार बदली और मोदी सरकार के तहत वर्षों पुरानी समस्याओं का हल हुआ।
शाह ने कहा कि भोले-भाले आदिवासियों के सामने यह गलत विमर्श रखा गया था कि उन्हें न्याय दिलाने और उनके अधिकार की खातिर यह लड़ाई लड़ी जा रही है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘नक्सल का मूल कारण विकास की मांग, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है। इसका विकास से कोई लेनादेना नहीं है. इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा कि अन्याय होने पर हथियार उठा लेना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है और ऐसी गतिविधि मोदी सरकार के दौरान कभी स्वीकार्य नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि अन्याय किसी के भी साथ हो सकता है, विकास कहीं पर भी कम-ज्यादा हो सकता है, ‘‘लेकिन संवैधानिक तरीके से लड़ा जा सकता है, हथियार लेकर नहीं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “यह हमारी सरकार की नीति है. बातचीत केवल उन्हीं से की जाएगी जो अपने हथियार डाल देंगे. जो गोलियों का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें गोलियों से जवाब दिया जाएगा।”









