पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दिया गया है। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं और 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता ले सकते हैं।
संविधान के अनुसार, राज्यसभा के लिए चुने जाने के 14 दिनों के अंदर विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना जरूरी होता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो राज्यसभा की सदस्यता खुद समाप्त हो जाती है। मुख्यमंत्री ने इस संवैधानिक व्यवस्था का पालन करते हुए आज 30 मार्च को इस्तीफा सौंप दिया।
नवंबर 2005 में पहली बार बिहार की सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने हमेशा विधान परिषद के रास्ते मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। 1985 में हरनौत से विधायक चुने जाने के बाद वे लोकसभा सदस्य भी रहे और केंद्र में मंत्री पद भी संभाला। लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की बजाय विधान परिषद की सदस्यता को प्राथमिकता दी।
इस्तीफे के बाद भी बनें रहेंगे सीएम?
नीतीश कुमार ने भले ही बिहार से दिल्ली जाने का मन बना लिया हो लेकिन अभी तक उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा नहीं दिया है। वह सीएम पद से कब इस्तीफा देंगे इसको लेकर अभी कुछ जानकारी पार्टी की ओर से शेयर नहीं की गई है। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने साफ किया है कि अगर नीतीश कुमार चाहें तो वह अगले 6 महीनों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रह सकते हैं।










