देहरादून: धामी सरकार ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है. उसके बाद भी विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने अंकिता भंडारी मामले की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग को लेकर रविवार को उत्तराखंड बंद किया. हालांकि, बंद का असर प्रदेश के कुछ इलाकों में ही देखने को मिला.
रविवार सुबह अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले देहरादून में यूकेडी, कांग्रेसी, राज्य आंदोलनकारी कमला पंत और सामाजिक कार्यकर्ता मोहित डिमरी के नेतृत्व में घंटाघर पर एकत्रित हुए. उसके बाद पैदल मार्च निकालते हुए पलटन बाजार पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से व्यापारियों को दुकाने बंद करने का आग्रह किया, लेकिन जैसे ही जुलूस कोतवाली की तरफ बढ़ा, व्यवसासियों ने अपनी दुकानें और प्रतिष्ठान फिर से खोल दिए. इस दौरान विपक्षी पार्टियों और विभिन्न संगठनों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के नाम के खुलासे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. दोपहर डेढ़ बजे के आसपास विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का प्रदर्शन गांधी पार्क में पहुंचकर समाप्त हुआ.
पूरे प्रदेश में बंद का मिला जुला असर देखने को मिला.पहाड़ी जिलों में व्यापक असर देखने को मिला है. हालांकि, देहरादून में बंद का मिलाजुला असर रहा.चमोली के गैरसैंण के अलावा गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, नंदानगर में पूर्ण रूप से बाजार बंद हैं. जबकि ज्योतिर्मठ में बंद का मिला जुला असर नजर आया है.
बंद के दौरान बाजार क्षेत्र में दुकानें बंद रहीं, जिससे जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित रहा. हालांकि, आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं. वहीं सामाजिक संगठनों ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने इस मामले में शीघ्र और सख्त कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. व्यापारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन करते हुए अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग की है.










