चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी का बयान, EVM में नहीं, अब वोटर लिस्ट से हो रही ‘वोट चोरी’!

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच, पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को यहां भारत निर्वाचन आयोग से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची के शुद्धिकरण के उद्देश्य से किए जा रहे इस अभ्यास के संचालन और कार्यान्वयन को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं.

चुनाव आयोग के मुख्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह और विवेक जोशी के साथ हुई यह बैठक दो घंटे से अधिक समय तक चली. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े तमाम मुद्दों से अवगत कराया. उन्होंने चुनाव आयोग को एक पत्र भी सौंपा, जिसमें इन मुद्दों पर जोर देते हुए चुनाव निकाय से इस मामले की जांच करने की मांग की गई.

मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित अपने पत्र में टीएमसी ने लिखा, “हम पश्चिम बंगाल में चल रही ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया के संबंध में गहरी चिंता के साथ आपको लिख रहे हैं, जिसने निष्पक्षता, आनुपातिकता और तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्पष्टीकरण मांगने के बार-बार के प्रयासों के बावजूद, हमारे आवेदनों का कोई जवाब नहीं मिला है और एसआईआर के कार्यान्वयन में परेशान करने वाले पैटर्न तेजी से स्पष्ट होते जा रहे हैं.”

पार्टी ने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया में 80,000 बीएलओ , 8,000 बीएलओ सुपरवाइजर, 4,000 एईआरओ , 300 ईआरओ और 23 डीईओ शामिल थे. ऐसे में चुनाव आयोग के लिए तार्किक रूप से यह असंभव है कि उसने उसी दिन 7.66 करोड़ मतदाताओं के डेटा का विश्लेषण कर लिया हो और विसंगतियों की यह सूची तैयार कर ली हो.

पार्टी ने कहा, “यह चौंकाने वाली बात है कि बड़े पैमाने पर SIR एक्सरसाइज न सिर्फ BLOS, EROs और AEROs जैसे अलग-अलग अधिकारियों के लिए बिना किसी पब्लिक गाइडलाइन के की जा रही है, बल्कि ECI खराब ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे वोटरों को बेवजह नोटिस जारी करके वोटरों को वोट देने से पहले कभी नहीं रोका जाएगा. इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि वोटरों को सेंट्रली जेनरेटेड नोटिस जारी करके कानूनी तौर पर तय ERO और AERO रूट को दरकिनार किया जा रहा है.”

इसके अलावा, इसने सीनियर सिटिजन, PwDs और बीमार वोटरों पर पड़ने वाली “मुश्किलों”, “चुनिंदा टारगेटिंग” और घुसपैठ के आरोपों पर भी चर्चा की गयी.

इसमें कहा गया, “अगर SIR का मकसद गैर-कानूनी घुसपैठियों का पता लगाना, उन्हें वोटर लिस्ट से हटाना और उनका कानूनी तरीके से देश निकाला पक्का करना था, तो यह साफ नहीं है कि बांग्लादेश या म्यांमार के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले दूसरे राज्यों में ऐसा प्रोसेस क्यों नहीं किया गया. पश्चिम बंगाल को खास तौर पर निशाना बनाया गया है, जिससे यह गंभीर चिंता पैदा हो रही है कि इस काम का मकसद आम बंगाली वोटरों को परेशान करना, डराना और बेइज्जत करना हो सकता है.”

TMC ने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से लगभग 58 लाख वोटर्स के नाम पहले ही हटा दिए गए हैं, फिर भी इलेक्शन कमीशन ने यह नहीं बताया है कि इनमें से कितने नाम हटाए गए हैं, जिसमें विदेशी नागरिक शामिल हैं, वही कैटेगरी जिसे SIR टारगेट करने का दावा करता है.”

अभिषेक बनर्जी ने इन मुद्दों की जानकारी देते हुए कहा, “लोकतंत्र से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. बंगाल के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी जनविरोधी भाजपा और उसके सहयोगी चुनाव आयोग के सामने एक इंच भी समर्पण नहीं किया जाएगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि “वोट चोरी ईवीएम में नहीं हो रही है, बल्कि यह मतदाता सूची में हो रही है.”

News 7
Author: News 7

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