देहरादून में राहुल गांधी का बदला अंदाज, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक पर रहा फोकस, न बीजेपी पर हमला, न पीएम मोदी का लिया नाम

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देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का अंदाज पिछले कई कार्यक्रमों से अलग अंदाज़ में नजर आया। भारी बारिश के बीच  ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने लगभग पूरा समय देश की शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य पर चर्चा की। 

दिलचस्प बात ये रही कि पूरे संबोधन के दौरान उन्होंने न तो बीजेपी पर हमला बोला, ना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। इतना ही नहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी कोई जिक्र नहीं किया। पूरा कार्यक्रम शिक्षा व्यवस्था के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा।

मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी तादाद में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा और अभिभावक कार्यक्रम में पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही राहुल गांधी ने भाषण देने के बजाय युवाओं की बात सुनने को प्राथमिकता दी। उन्होंने सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को मंच पर बुलाया और उनसे भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और रोजगार को लेकर उनके अनुभव साझा कराए।

राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब मेहनत से पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित होता है, तो केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि, लाखों युवाओं का विश्वास भी टूटता है। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। अपने भाषण में उन्होंने विभिन्न आंकड़ों और उदाहरणों के माध्यम से ये बताने की कोशिश की कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

इसके अलावा राहुल गांधी ने उस छात्रा के परिजनों से मुलाकात की, जिसने नीट परीक्षा के बाद आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने परिवार की पीड़ा को सुना और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मानसिक तनाव के मुद्दे को भी उठाया।

देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम बिलकुल अलग रहा। पूरे संबोधन में राहुल गांधी ने किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, न सरकार पर सीधे व्यक्तिगत आरोप लगाए और न ही किसी नेता को निशाने पर रखा। इससे यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि कार्यक्रम का मक़सद सिर्फ़ छात्रों की समस्याओं को सामने रखना था, और उनका हल कैसे निकाला जाए इस पर फोकस था।

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Author: News 7

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