उत्तराखंड में लागू अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम पर बोले मंत्री किरेन रिजिजू, दूसरे राज्यों में भी दोहराया जाएगा

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देहरादून: उत्तराखंड में संचालित 452 मदरसों के साथ ही अल्पसंख्यक स्कूलों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के साथ अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी।राज्य सरकार इस निर्णय पर भले ही तमाम सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हो, लेकिन प्रदेश के अल्पसंख्यक बच्चों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।वहीं, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व में शामिल होने पहुंचे अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये निर्णय अन्य राज्यों में भी दोहराया जाएगा।

दरअसल,अरबिया मदरसों को सरकार की तरफ से मिलने वाले सरकारी अनुदान की व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया है. जिस प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल गई है।उत्तराखंड राज्य में मदरसा बोर्ड से रजिस्टर्ड करीब 452 मदरसे संचालित हो रहे हैं, लेकिन प्रदेश में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू होने के बाद अब इन सभी मदरसों को शिक्षा बोर्ड और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी।तभी इन मदरसों का संचालन किया जा सकेगा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्पसंख्यकों की शिक्षा जो अधिनियम बनाया है उसके लिए मंत्री किरेन रिजिजू ने सीएम धामी को बधाई दी है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जितने भी अल्पसंख्यक हैं, उनको बराबर शिक्षा मिलनी चाहिए।सरकार तुष्टिकरण की राजनीति नहीं करती हैं, जबकि सभी को न्याय देते हैं। ऐसे में पार्टी की जो विचारधारा है उसी को ध्यान में रखते हुए सीएम धामी ने ये अधिनियम प्रदेश में लागू किया है।

किरेन रिजिजू ने सीएम धामी की तारीफ करते हुए कहा कि विपक्ष के लोग भी सीएम धामी को बुरा नहीं देते हैं।हालांकि, विरोध में लोग बोलेंगे ही क्योंकि राजनीतिक पार्टी है। ऐसे में चुनाव और राजनीति में लोग तो बोलते ही हैं।लेकिन कोई दिल से बुरा भला नहीं कहता है।

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Author: News 7

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