अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गुरुवार को थाना राम जन्मभूमि में आठ लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है। यह मुकदमा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त ट्रस्टी कृष्ण मोहन की लिखित तहरीर पर आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया। SIT ने अपनी प्राथमिक गोपनीय रिपोर्ट अपर गृह सचिव संजय प्रसाद को सौंपी थी।शासन स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।इन सभी नामजद आरोपियों के विरुद्ध नए कानूनी प्रावधानों के तहत धारा 306, 316, 317 और 61 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला: इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार और एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक अकाउंट से एक पोस्ट साझा करते हुए इस पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा किया। अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी, फुनगी को फाँसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी!”।उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता के बीच अब यह पुख्ता धारणा बन रही है कि पहले एसआईटी के बहाने मामले के सारे मुख्य सबूत साफ कर दिए गए होंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि जांच के नाम पर पहले यह पूरी तरह से तय कर लिया गया होगा कि किन बड़ी और रसूखदार मछलियों को बचाना है और किसे इस मामले में फंसाना है। उनका कहना है कि इस सुनियोजित बैकग्राउंड वर्क के पूरा होने के बाद ही दिखावे के लिए पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसआईटी को शासन स्तर से पहले ही मनमाफिक रिपोर्ट तैयार करके दे दी गई होगी और उसी के अनुरूप जांच का नाटक किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घोटाले की जांच का निष्कर्ष पहले ही तय कर लिया गया था और बाद में उसके अनुसार केवल कानूनी कार्रवाई की औपचारिकता की गई।









