मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, धार भोजशाला को बताया मंदिर , SC जा सकता है मुस्लिम पक्ष

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एमपी: धार भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर मंदिर ही है। हाईकोर्ट इंदौर डिवीजन बेंच ने हिंदुओं के हक में अपना फैसला सुनाते हुए भोजशाला को मंदिर का दर्जा दिया है।

मस्जिद पक्ष को अलग जमीन दी जाएगी। इसके लिए मस्जिद पक्ष सरकार से याचिका करे। कोर्ट के फैसले के बाद धार भोजशाला में अब नमाज पर रोक लग गई है, अब सिर्फ यहां पूजा होगी।

धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष का मानना है कि यह राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर है। वे इसे एक प्राचीन विश्वविद्यालय और शोध केंद्र मानते हैं। जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। उनका कहना है कि यहां सदियों से नमाज अदा की जाती रही है। इस परिसर में पूजा और नमाज को लेकर सालों से कानूनी और धार्मिक विवाद चलता आ रहा है।

12 मई 2026 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और ASI रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

धार जिले में पुलिस और प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती है। भोजशाला परिसर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाहों को तुरंत रोका जा सके। प्रशासन ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

 

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Author: News 7

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