देहरादून/बाजपुर: उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राजधानी देहरादून में बीते 15 दिनों के भीतर हुई पांच हत्याओं पर गहरी चिंता जताते हुए इसे कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताया है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश की राजधानी ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और शासन-प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। लगातार हो रही जघन्य घटनाएं पुलिस तंत्र की कमजोरी को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि या तो पुलिस पर दबाव है या फिर कहीं न कहीं लापरवाही बरती जा रही है। अपराधियों में कानून का भय समाप्त होता जा रहा है और खुफिया व निगरानी तंत्र भी कमजोर पड़ चुका है। राजधानी में इतने कम समय में पांच हत्याएं होना किसी भी सरकार के लिए गंभीर चेतावनी है।
यशपाल आर्य ने सरकार से सभी मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने, अपराध नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने, पुलिस गश्त व खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा कार्रवाई की जानकारी जनता को पारदर्शी रूप से देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कठोर और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का सरकार पर से विश्वास उठ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी सुरक्षित होगी तभी राज्य सुरक्षित होगा। अब बयानबाजी नहीं, ठोस कार्रवाई का समय है।
उधर दूसरी तरफ देहरादून में बिगड़ती कानून-व्यवस्थाओं को लेकर शुक्रवार को NSUI के छात्रों ने पुलिस मुख्यालय का घेराव किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से भी झड़प हुई.
इस दौरान NSUI के दर्जनों युवा छात्रों ने पुलिस मुख्यालय के सामने खड़े होकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और प्रदेश में लगातार लचर होती कानून व्यवस्था पर अपना विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस मुख्यालय पर लगातार उग्र होते इस प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस कर्मियों द्वारा इस प्रदर्शन को रोका गया और ज़बरन इस प्रदर्शन को बंद करवाया गया है, जिसके बाद NSUI के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच खूब धक्का मुक्की भी देखने को मिली.
देहरादून में खुलेआम गोलियां चल रही है. खुलेआम लड़कियों का गला काटा जा रहा है और वो भी घंटाघर, पलटन बाजार, परेड ग्राउंड और राजपुर रोड जैसे पॉश इलाकों में हैं. यही पर लोग सुरक्षित नहीं है तो प्रदेश के दूरदराज वाले इलाकों में क्या सुरक्षित होंगे?










