देवघर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को देवघर के तपोवन स्थित श्री श्री मोहनानंद विद्यालय में आयोजित बीएलओ संवाद कार्यक्रम में कहा कि ‘जैसे लोकतंत्र का आधार शुद्ध मतदाता सूची है, वैसे ही शुद्ध मतदाता सूची का आधार इसे तैयार करने वाले बीएलओ हैं.’ उन्होंने बीएलओ को लोकतंत्र के ‘अदृश्य नायक’ बताते हुए कहा कि आयोग का लक्ष्य है कि ‘कोई भी पात्र भारतीय मतदाता सूची से न छूटे’.
उन्होंने बताया कि कई बार बीएलओ को घर घर जाकर मतदाता सूची के कार्य करने में उनकी पहचान बताने के लिए कोई आईडी कार्ड नहीं होते थे, जिससे लोग उन्हें संशय की दृष्टि से देखते थे. भारत निर्वाचन आयोग की ओर से बीएलओ का पहचान पत्र बनाया गया है, जिससे अब हर बीएलओ के पास अपना आईडी कार्ड है और उन्हें डोर टू डोर वेरिफिकेशन में किसी प्रकार का संकोच नहीं होता.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि दो दिवसीय देवघर-दुमका प्रवास के दौरान उन्होंने बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकीनाथ का दर्शन किया. उन्होंने बीएलओ को ‘चुनाव आयोग का प्रहरी और आधार स्तंभ’ बताया. उन्होंने विश्वास जताया कि झारखंड में जब भी ‘गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम’ की घोषणा होगी, उसे सुगमता और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया जा सकेगा.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने दो टूक कहा कि मतदाता सूची में किसी भी गैर नागरिक का नाम होना संविधान के खिलाफ है. इसी को ध्यान में रखते हुए देश के 12 राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की शुरुआत की गई है, जिसे आने वाले समय में पूरे देश में लागू किया जाएगा. इसका एकमात्र उद्देश्य है कि केवल पात्र भारतीय नागरिकों को ही मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना है.










