सरकार के 9 दिसंबर को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस के लिए सहमत होने के बाद इंडिया ब्लॉक ने जीत का दावा किया. देश भर के राज्यों में वोटर लिस्ट का एसआईआर, चुनाव सुधारों पर बहस का हिस्सा होगा, जिसकी मांग विपक्ष 1 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से कर रहा था.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साफ कर दिया था कि एसआईआर लोकतंत्र से जुड़ा है और इसलिए इस मुद्दे पर बहस होनी चाहिए. विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों में संसद भवन के बाहर इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी किया था.
हालांकि विपक्ष के हंगामे के चलते संसद 2 दिन नही चल पायी सरकार आखिरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए मान गई.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘एसआईआर एक बहुत ही पेचीदा मुद्दा है और पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में जिस तरह से इसे लागू किया जा रहा है, उसमें कई कमियां हैं. बीजेपी बंगाल में राजनीतिक मकसद से इसे आगे बढ़ा रही है, लेकिन हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे. हमने चुनाव आयोग के सामने अपनी चिंताओं को विस्तार से रखा था, लेकिन हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. यह अच्छा है कि विपक्ष का दबाव काम आया और वे बहस के लिए मान गए. सरकार की जिद के कारण मॉनसून सेशन नहीं हो पाया.










