श्रीनगर: लद्दाख में स्थिति को गंभीर बताते हुए सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि नई दिल्ली को लद्दाख नेतृत्व के साथ शीघ्र बातचीत शुरू करनी चाहिए क्योंकि यह क्षेत्र चीन के साथ सीमा साझा करता है.
उन्होंने यहाँ बताया, ‘कोई न कोई इस कमी को पूरा करेगा. यह बहुत संवेदनशील क्षेत्र है. चीनी सीमा विवाद इससे जुड़ा है. वह मैकमोहन रेखा को स्वीकार नहीं करता. प्रधानमंत्री इस समस्या से बाहर निकलने के लिए चीन क्यों गए?’ अब्दुल्ला ने कहा कि भारत सरकार को बातचीत करके इस मुद्दे को सुलझाने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए.’
अब्दुल्ला ने लेह में विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी हाथ होने से इनकार करते हुए कहा कि ये विरोध प्रदर्शन लोगों की आवाज हो सकते हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसके पीछे किसी पार्टी का हाथ है. वे विदेशी हाथ को दोष दे सकते हैं लेकिन यह लोगों की आवाज है.’
एक दिन पहले व्यापक झड़पों में पाँच लोग मारे गए और 70 से अधिक घायल हो गए. पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा लेह जिले में कर्फ्यू लगाए जाने के बाद 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया. उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के पीछे किसी भी साजिश से इनकार किया और लद्दाख में रोजगार समेत अपने वादों को पूरा न करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आगे कहा, ‘वे पिछले पाँच सालों से चुपचाप विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन उन्हें रोजगार के वादे खोखले लगे.










