इस ट्रैफिक वॉर के चलते दुनिया भर के देशों के रिश्ते बिगड़ रहे हैं. हरेक शासक अपने देश की खातिर एक दूसरे पर टैरिफ मिसाइलें दाग रहा है. इतना ही नहीं आने वाले समय के लिए दूसरे मुल्क के लिए टैरिफ रूपी लैंडमाइंस भी बिछा रहा है. ऐसा इसलिए हो रहा है कि हरेक देश अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आड़ में खुद और अपनी कंट्री का एजेंडा साध रहा है.
ऐसे में सवाल उठता है कि ये टैरिफ (Tariff) नाम की बला क्या है? ये क्या करता है? कौन, किस पर टैरिफ लगाता है, क्यों लगाता है? इसके नुकसान क्या हैं? फायदे क्या हैं? टैक्स क्या होता है और टैरिफ क्या होता है. दोनों में फर्क क्या होता है? इस तरह के ढेरों सवाल उठते हैं.
टैरिफ क्या है
सीधे तरीके से समझें, तो टैरिफ दूसरे देशों से खरीदे जाने वाले या बेचे जाने वाला सामान पर लगाया गया शुल्क होता है. इसको हम आयात टैरिफ (Import Tariff) और निर्यात टैरिफ (Export Tariff) के रूप में समझ सकते हैं.
इसको हम ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे कि यूएसए ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया. इसका सीधा सपाट मतलब है कि भारत से अमेरिका जाने वाला 1000 रुपए का सामान वहां महंगा होकर 1500 रुपए का हो जाएगा. इस तरह से 1000 की चीज यूएस पहुंचने पर 50 फीसदी टैरिफ लगने की वजह से 1500 रुपए में मिलेगी.
अब यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि लोग इसी चीज को समझ नहीं पा रहे हैं कि 50 फीसदी टैरिफ लगने के बाद अमेरिका जैसे देश को क्या नफा-नुकसान हो रहा है. एक तरह से देखें तो वो अपने देशवासियों का सिरदर्द ही बढ़ा रहा है. उसके नागरिकों को सामान महंगा मिल रहा है. वहीं अमेरिका के इस बढ़े टैरिफ से भारत को क्या नुकसान है. इंडिया क्यों पसीने से तर-बतर हो रहा है. वो भी समझते हैं.
अब हम इसी 50 फीसदी टैरिफ के खेल को समझाने की कोशिश कर रहे हैं. जैसे कि आप अमेरिका में रह रहे हो. आप उस सामान को यूज करते हो, जो भारत से वहां आता है. अब यूएस द्वारा उसी सामान की खरीदारी पर पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने से आपको, एक हजार रुपए की जगह पर 15 सौ रुपए देने होंगे. यानी कि आपको उसी हजार रुपए सामान के लिए अपने खून-पसीने की कमाई के 500 रुपए एक्ट्रा खर्च करने पड़ेंगे.
अब इसी के दूसरे लेयर की बात करें, तो अगर आप सामान खरीदते हैं तो 50 फीसदी टैरिफ का 500 रुपया अमेरिकी सरकार के कोषागार में चला जाएगा. इससे अमेरिका को सीधे फायदा होगा. उसका सरकारी राजस्व बढ़ेगा. ये पैसे विकास पर खर्च होंगे. वहीं पर अगर आप बढ़े हुए दाम पर, उस भारतीय सामान को नहीं खरीदते हैं. तो वहां के सस्ते में मिलने वाले प्रोडक्ट आप खरीदेंगे या किसी और ऑप्शन की ओर सोचेंगे.
इस बात को ध्यान से समझिए. अगर आप उस आयातित भारतीय माल को खरीदते हैं तो सीधे अमेरिकी सरकार को फायदा हो रहा है. अगर उस इंडियन प्रोडक्ट की बजाय अमेरिका में बने सामान को खरीदने लगते हैं तो उससे उनके देश का सामान बिकेगा. उनका खुद का प्रोडक्शन बढ़ेगा. लोगों को रोजगार मिलेगा. इस तरह से देखें तो इस 50 फीसदी टैरिफ लगाने से अमेरिका में रह रहे लोग भारत का सामान खरीदें या अमेरिका का बना हुआ सामान खरीदें. दोनों ही स्थितियों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ही चांदी होगी. उनको ही फायदा होगा. यही उनके टैरिफ लगाने का मकसद है. कुछ इसी तरह से बाकी देश भी अपनी अथव्यवस्था को चमकाने के लिए करते हैं.
वहीं अब इस 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ से भारत को तात्कालिक और दीर्घकालिक क्या नफा-नुकसान हो सकता है. उसको समझने की कोशिश करते हैं. पहला, ये कि आप ये मानकर चलें कि पैसे में दम होता है, जेब खाली होते ही दिमाग में बिजली कौंध जाती है. जैसे ही भारतीय सामान की अमेरिका में कीमत बढ़ेगी. इस हालात में कुछ लोग खरीदना जारी रखेंगे. कुछ लोग सामान की क्वांटिटी कम कर देंगे. वहीं कुछ लोग दूसरे ऑप्शन यानी उसी से मिलते जुलते सामान की खरीदारी करने लगेंगे.
इसका सीधा असर भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ेगा. भारतीय सामान का निर्यात कम हो जाएगा. भारतीय बिजनेसमैन को अपना प्रोडक्शन कम करना पड़ेगा या रोकना पड़ेगा या दुनिया में किसी और देश में बाजार की तलाश करनी पड़ेगी. ऐसे में अगर भारतीय प्रोडेक्ट के उत्पादन पर असर पड़ा, तो उसके निर्माण से जुड़े लोगों की जीविका पर बुरा असर पड़ेगा. कच्चे माल की खपत नहीं होगी. कंपनी के कर्मचारियों की छंटनी होगी. इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. राजस्व में कमी आएगी. इकॉनमी पर असर दिखने लगेगा.
इसी तरह से निर्यात पर भी एक देश दूसरे अन्य देश पर टैरिफ लगाकर अपना फायदा-नुकसान देख कर काम करते हैं.
कैसे काम करता है टैरिफ 
दो या दो से अधिक देशों के लिए टैरिफ कैसे काम करता है. इसको सीधे सपाट तौर पर ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे कोई देश, विदेश में किसी देश को अपना सामान बेच रहा है तो उस पर वो टैरिफ लगा देता है. जैसे कि एक्सपोर्ट पर 10 फीसदी लगाने का मतलब ये हुआ कि भेजने वाले देश ने उस खरीदार देश पर 10 फीसदी ज्यादा शुल्क लगा दिया. ऐसे में दूसरे देश को ये सामान महंगे में खरीदना पड़ेगा.










