नई दिल्लीः ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का साझा घोषणापत्र जारी हो गया है। इसमें ग्लोबल साउथ के लिए समान भागीदारी का आह्वान किया गया है। इसमें भविष्य की टेक्नोलॉजी और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में ‘ग्लोबल साउथ’ की समान भागीदारी की मांग की गई। भारत मंडपम में समिट के दौरान यह घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलते वैश्विक ढांचे को पुराने पड़ चुके संस्थानों द्वारा नहीं चलाया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात का ऐलान करते हुए कहा कि घोषणापत्र को सभी सदस्य देशों की आम सहमति से पास किया गया है और किसी भी सदस्य ने इस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सोच में विविधता के साथ-साथ, ब्रिक्स सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। आज की चर्चा से यह साफ हो गया है कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के ज़रिए नहीं चलाया जा सकता। प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार ज़रूरी हैं।
इस घोषणापत्र में दुनिया में कहीं भी होने वाले एकतरफा युद्ध और सैन्य आक्रामकता की कड़ी निंदा की गई है। हालांकि इसमें किसी भी विशेष देश का नाम नहीं लिया गया है।ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच चल रहे तनाव के बावजूद, भारतीय राजनयिकों के प्रयासों से दोनों देश इस साझा प्रस्ताव पर एक साथ आने के लिए सहमत हो गए हैं।
यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि हाल के महीनों में सदस्यों के बीच कई मतभेद उभरकर सामने आए थे, जिन्हें दूर कर एक साझा सहमति बनाना एक बड़ा काम था।









