नई दिल्ली- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा ने आज संसद में जमकर हमला किया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरलाके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए अमित शाह ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि “उन्हें अचानक एक विचार आया – अपनी ही प्रेसहमला करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “उन्हें अचानक एक विचार आया – अपनी ही प्रे कॉन्फ्रेंस पर बहस करवा लें।यह कोई बाजार नहीं है. यह लोकसभा है…
आपके परदादा से लेकर आपकी दादी और आपके पिता तक, भारत में कई महान नेता हुए हैं। लोकसभा में किसी की भी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हुई। अगर उन्हें उम्मीद है कि उनकी झूठ पर आधारित ‘महान प्रेस कॉन्फ्रेंस’ पर सदन में बहस होगी, तो ओम बिरला ने सदन के मानकों को गिरने न देकर सदन पर एहसान किया है।”
‘जब राहुल गांधी को मौका मिलता है, तो वो जर्मनी, इंग्लैंड में नजर आते हैं’
“विपक्ष के नेता को शिकायत है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, उनकी आवाज़ दबाई जाती है। मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि कौन तय करेगा कि किसे बोलना है ? स्पीकर? नहीं, यह आपको तय करना है। लेकिन जब बोलने का मौका मिलता है, तो आप जर्मनी, इंग्लैंड में नज़र आते हैं. फिर वे शिकायत करते हैं… कांग्रेस सांसदों ने 18वीं लोकसभा में 157 घंटे और 55 मिनट तक बात की. विपक्ष के नेता ने कितना बोला? आप क्यों नहीं बोले? किस स्पीकर ने आपको रोका? कोई नहीं रोक सकता. लोकसभा को बदनाम करने के लिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है।”
“हम भी विपक्ष में रहे हैं, तीन बार लोकसभा के स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव आया, मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए. हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग भी करी है। किसी के एडवाइजर एक्टिविस्ट हो सकते हैं, किसी के एडवाइजर आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं। मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है… इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं।”
“पहले जो तीन बार प्रस्ताव आया था, वो तब आया जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लाए. तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे. लेकिन ओम बिरला जी एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने मोरल ग्राउंड पर जब से इन्होंने उन्हें नामित किया, तब से वो नहीं आए हैं।”










