शराब घोटाला केस में कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को किया बरी, केजरीवाल बोले, मोदी सरकार ने हमारे खिलाफ रचा था षड्यंत्र

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली: शराब घोटाला केस में दिल्ली कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने सबूतों के अभाव में दोनों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों के खिलाफ बिना सबूत के आरोप साबित नहीं होता है।

कोर्ट के बाहर केजरीवाल ने मीडिया से बात की, इस दौरान वे बात करते हुए रोने लगे, उन्होंने कहा…

जिस तरह से बीजेपी शराब घोटाला, शराब घोटाला कर रही थी, हमारे ऊपर आरोप लगा रही थी। आज कोर्ट ने हमें बरी कर दिया। हम हमेशा कहते थे सत्य की जीत होती है। भगवान हमारे साथ है। सत्य की जीत हुई। मोदी जी और अमित शाह जी ने यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी के टॉप 4 लीडर को जेल में डाल दिया। सिटिंग मुख्यमंत्री को जेल में डाल दिया। चौबीस घंटे खबरें दिखाई जाती थीं कि केजरीवाल भ्रष्ट है। मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई। मैं प्रधानमंत्री जी से अपील करता हूं कि देश में इतनी समस्याएं हैं, उन्हें दूर करके अच्छे काम करके सत्ता में आइए। दूसरों पर आरोप लगाना प्रधानमंत्री जी को शोभा नहीं देता।

कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते।

केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सामग्री के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। किसी भी बयान या सबूत के अभाव में केजरीवाल को साजिश का हिस्सा बताना टिक नहीं सकता।

चार्जशीट में ऐसी कई बातें शामिल की गईं, जिनका गवाहों के बयानों से कोई संबंध नहीं है।

मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह को बरी करते हुए जज ने कहा कि हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं थी।

मनीष सिसोदिया पर आरोप था कि वे शराब नीति बनाने और लागू करने के जिम्मेदार थे, लेकिन अदालत ने कहा कि उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई।

बता दें कि कई साल पहले दिल्ली शराब नीति को लेकर CAG की रिपोर्ट लीक हुई थी। इसमें सरकार को 2026 करोड़ रुपए का रेवेन्यू लॉस होने की बात कही गई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब नीति में काफी गड़बड़ियां थीं, जिनमें लाइसेंस देने में खामी भी शामिल है। इसके साथ ही AAP लीडर्स को कथित तौर पर घूस के जरिए फायदा पहुंचाया गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि डिप्टी चीफ मिनिस्टर जिस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की अगुआई कर रहे थे, उसने एक्सपर्ट पैनल के सुझावों को खारिज कर दिया था। कैबिनेट ने नीति को मंजूरी दे दी थी और कई अहम फैसलों पर तब के उपराज्यपाल की मंजूरी भी नहीं ली गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतों के बावजूद सभी को नीलामी की बोली लगाने की मंजूरी दे दी गई थी। जिन्हें घाटा हुआ था, उन्हें भी लाइसेंस दे दिए गए या रीन्यू कर दिए गए थे।

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के कोर्ट से बरी हो जाने के बाद एक बात तो साफ है आम आदमी पार्टी के खिलाफ बहुत बड़े पैमाने पर साज़िश रची गई थी।

News 7
Author: News 7

Leave a Comment

और पढ़ें

Orpheus Financial