नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में उसके स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को पटरी से उतारने, नाकाम करने और रोकने के लिए जानबूझकर और सुनियोजित कोशिशें की जा रही है.
चुनाव आयोग ने एक अतिरिक्त हलफनामे में कहा कि इस मामले में एक गंभीर संवैधानिक चिंता का मामला उठता है. सम्मानपूर्वक यह बताया जाता है कि एसआईआर अभी 12 राज्यों में चल रहा है. इस तरह का विवाद जिसमें राज्य की सत्ताधारी पार्टी बाधा डालने और अधिकारियों को धमकी देने में सक्रिय रूप से शामिल है, वह सिर्फ पश्चिम बंगाल राज्य तक ही सीमित है.
अफसोस की बात है कि यह गठबंधन सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है. ये हरकतें दिखाती है कि राज्य के सभी मुख्य लोग इसमें शामिल हैं. इसमें राज्य सरकार, सत्ताधारी पार्टी के कुछ चुने हुए प्रतिनिधि और पार्टी के पदाधिकारी शामिल हैं. हलफनामे में कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया को रोकने या नाकाम करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, चाहे वह सही तरीके से हो या गलत तरीके से.’
चुनाव आयोग ने कहा कि इन रुकावटों का जारी रहना और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा एसआईआर प्रक्रिया को पटरी से उतारने की सुनियोजित कोशिशें सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का सीधा उल्लंघन और गैर-अनुपालन है. हलफनामा में कहा गया, ‘रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों से पता चलता है कि सही प्लानिंग और मिलकर की गई कार्रवाई के जरिए, पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे एसआईआर अभियान को पटरी से उतारने, पंगु बनाने और नाकाम करने की जानबूझकर और सिस्टमैटिक कोशिशें की जा रही हैं.
चुनाव आयोग ने कहा कि हालांकि पश्चिम बंगाल ने अपने जवाबी हलफनामे में एसआईआर अभियान में चुनाव आयोग को पूरा सहयोग देने का वादा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत सुप्रीम कोर्ट के सामने दिए गए इस पक्के वादे से बिल्कुल अलग है.
चुनाव आयोग ने कहा कि जमीन पर बार-बार असहयोग, रुकावट, डराने-धमकाने और दखलअंदाजी की घटनाएं देखी गई हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मौजूदा मुख्यमंत्री, संसद सदस्यों और सत्ताधारी पार्टी के अन्य राजनीतिक पदाधिकारियों ने ऐसे सार्वजनिक बयान, भाषण दिए हैं, जिनका मकसद एसआईआर प्रक्रिया में लगे चुनाव अधिकारियों को डराना है.
इसमें कहा गया, ‘पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा और मुख्य चुनाव अधिकारी को सुरक्षा देनी पड़ी, जिसकी जरूरत एसआईआर से गुजर रहे किसी दूसरे राज्य में नहीं पड़ी.’ चुनाव आयोग ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, तो एसआईआर के खिलाफ असहयोग और रुकावट का एक संगठित अभियान शुरू किया गया. इसका मकसद संवैधानिक कर्तव्य निभा रही एक संवैधानिक संस्था द्वारा किए जा रहे काम को पटरी से उतारना था.
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि चुनाव आयोग के अनुरोध के अनुसार एफआईआर तुरंत दर्ज की जाएं और कंप्लायंस रिपोर्ट दी जाए. इसमें कहा गया,’पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित सभी राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकारी अधिकारियों को ईसीआई के निर्देशों को लागू करने और कंप्लायंस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया जाता है.’










