बंगाल में ECI के नोटिस जलाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- किसी को भी SIR में बाधा डालने की इजाजत नहीं देंगे

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मतदाता सूची के एसआईआर को पूरा करने में कोई बाधा नहीं आने देगा. अदालत ने कहा कि यह बात सभी राज्यों और राज्य अधिकारियों को साफ तौर पर समझ लेनी चाहिए.

 मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका भी शामिल थी.

सीएम ममता बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने बंगाल में SIR में वोटर्स के “बड़े पैमाने पर बाहर होने” की आशंका जताई. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की तरफ से वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एक सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल उन गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए किया जा रहा है जिनका कोई हल नहीं हो सकता.

दीवान ने कहा कि ‘तार्किक अंतर’ वाली श्रेणी के तहत 70 लाख लोगों को नोटिस मिले हैं. चुनाव आयोग के इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां कंप्यूटर तानाशाह बन गया है और यह तय करने के लिए कुछ सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हो रहा है कि वोटर लिस्ट में कौन रहेगा और किसे हटाना है. दीवान ने कहा, “हम किसी भी तरह का सामूहिक निष्कासन नहीं चाहते हैं.”

पीठ को बताया गया कि SIR प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरा हो जाएगी और फाइनल लिस्ट जारी कर दी जाएगी.

सीजेआई ने कहा, “एक बात बहुत जरूरी है. हम साफ करना चाहेंगे, जो भी आदेश, स्पष्टीकरण, अंतरिम निर्देश की जरूरत होगी, हमें जारी करना होगा. लेकिन हम SIR को पूरा करने में कोई बाधा नहीं आने देंगे, जिसे सभी राज्यों और राज्य अधिकारियों को साफ तौर पर समझना चाहिए.”

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की तरफ से दाखिल किए गए एफिडेविट पर विचार किया, जिसमें कुछ बदमाशों द्वारा उसके नोटिस जलाने का आरोप लगाया गया था. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस बारे में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. आयोग ने पीठ को बताया कि अब तक बदमाशों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई है.

पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चुनाव आयोग को 8,505 ग्रुप B अधिकारियों की सूची देने पर ध्यान दिया, और कहा कि उन्हें SIR प्रक्रिया में प्रशिक्षित करके काम पर रखा जा सकता है. पीठ ने कहा कि इन 8,505 अधिकारियों के काम करने का तरीका और वर्क प्रोफाइल चुनाव आयोग तय करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में बदलाव पर अंतिम फैसला हमेशा वोटर रोल अधिकारी (ERO) ही लेंगे.

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Author: News 7

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