बजट सत्र में विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते लोकसभा स्पीकर के खिलाफ सभी विपक्ष लामबंद हो गया है। संसद में रोज़ हंगामा हो रहा है। वहीं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, ‘लोकसभा स्पीकर के चैंबर में कांग्रेस सांसदों के बर्ताव की निंदा करने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे. जब कांग्रेस पार्टी के नेता का खुद पर ही कंट्रोल नहीं है, तो स्पीकर ने जो किया वह सही है. कांग्रेस ने कैसे प्लान बनाया था कि जब पीएम सदन में आएंगे तो उनसे कागज छीन लेंगे. संसद ‘गुंडागर्दी’ की जगह नहीं है लेकिन जब कांग्रेस ने ऐसा किया, तो हमने संयम से काम रखा. हर चीज की एक हद होती है. हम सदन चलाना चाहते हैं. अगर कांग्रेस नहीं चाहती कि सदन चले, तो दूसरे सांसदों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा.’
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘मैं बजट पर बोलने आया था, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार और लोकसभा स्पीकर सदन चलाने में इंटरेस्टेड नहीं हैं. वित्त मंत्री तो सदन में बैठी भी नहीं थी, मुझे लगता है कि उन्हें पता था कि सदन स्थगित हो जाएगा.’ लोकसभा स्पीकर ओम बिडला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के विपक्ष के कदम पर उन्होंने कहा, ‘यह मेरे हाथ में नहीं है, आप इस बारे में हाई कमांड से पूछ सकते हैं.’
कांग्रेस पार्टी की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को ‘महिला सांसदों के खिलाफ बेबुनियाद आरोपों और विपक्ष के संसदीय अधिकारों से इनकार’ के बारे में एक चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में लिखा, ‘हम यह चिट्ठी बहुत दुख और संवैधानिक जिम्मेदारी की गहरी भावना के साथ लिख रहे हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकसभा के स्पीकर और इस सम्मानित सदन के संवैधानिक संरक्षक होने के नाते, आपको सत्ताधारी पार्टी ने विपक्ष, खासकर इंडियन नेशनल कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ झूठे, बेबुनियाद और मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए मजबूर किया है.’
सदन चलाना सरकार का काम है:मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘देश के सामने बहुत गंभीर मुद्दे हैं. भारत-अमेरिका ट्रेड फ्रेमवर्क पर कथित जॉइंट स्टेटमेंट, अमेरिकी राष्ट्रपति का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर, जिसमें कहा गया है कि हमने रूस से तेल न खरीदने का वादा किया है. इन सबका हमारी आजादी और विदेश और आर्थिक नीति पर रणनीतिक असर पड़ेगा. सांसदों को सस्पेंड करने का मुद्दा भी है, और विपक्ष इन सभी मुद्दों पर बात करना चाहता था, लेकिन उसे ऐसा करने नहीं दिया गया.’ उन्होंने ये भी कहा, ‘सदन चलाना सरकार का काम है और अगर वह अड़ी रहती है, तो कुछ नहीं किया जा सकता. सरकार ने यह पक्का करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की है कि देश की सबसे बड़ी कानून बनाने वाली संस्था बेकार हो जाए.’










