उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड पुलिस की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता स्वाति जिसको लगातार नेहरू कॉलोनी थाने की पुलिस द्वारा विभिन्न तरह से दबाव बनाकर पुलिस द्वारा एवं हिंदू संगठनों द्वारा भी परेशान किया जा रहा है जब बात धमकी तक पहुंच गई तब मामले को मीडिया के सामने रखा गया। स्वाति को बजरंग दल व RSS द्वारा परेशान किया गया उसके मकान मालिक से कहा गया इससे कमरा खाली करवाओ ये हिंदू विरोधी है।

जैसा कोटद्वार में दीपक के साथ हुआ उसने और डर पैदा कर दिया है। उत्तराखंड पुलिस सच बोलने वालों को तो सच बोलने से रोकती है और खुले आम धमकी देने वालों के साथ अपना मित्रता पूर्ण संबंध दिखाती है। उत्तराखंड पुलिस ने कई लोगों पर झूठे मुकदमे किए हैं। इसके कई उदाहरण सबूत के साथ हमारे पास है जिनमें से एक है प्रवीण भारद्वाज जी और अगर कोई सच्चा इंसान FIR करवाता है जैसे त्रिलोचन भट्ट जी तो पुलिस उस मुकदमे को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं।
पुलिस का यह रवैया एक बहुत चिंता का विषय है और पुलिस व्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है कि आखिर सच्चे मुकदमों पर कार्रवाई न के बराबर और झूठे मुकदमों पर तुरंत कार्यवाही।
चाहे मामला अंकित भंडारी के VIP का हो, कोटद्वार के दीपक का हो या केशव थलवाल के ऊपर पेशाब करना हो, एंजेल चकमा की मृत्यु हो या फिर विकासनगर में मुस्लिम बच्चे को धर्म के सुधार पर मारना। पुलिस का जनता के प्रति यह व्यवहार देश के संवैधानिक मूल्यों पर खतरा है।
सामाजिक संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जल्द कानून व्यवस्था पर काबू नहीं पाया गया तो उत्तराखंड की जनता पुलिस प्रशासन के द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को सही से न निभाने के लिए आंदोलन के रूप में सड़कों पर उतरेगी।
इस मौके पर में इंद्रेश मैखुरी, प्रवीण भारद्वाज, स्वाति नेगी, त्रिलोचन भट्ट, कमला पंत हेमा भंडारी, रवि चोपड़ा, निर्मला बिष्ट, विमला, हरि ॐ पाली, आदि मौजूद रहे।










