नई दिल्ली: देश में जनगणना 2027 के लिए 11 हजार 718 करोड़ के बजट को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. मंत्री वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि, 2027 में होने वाली जनगणना पहली डिजिटल जनगणना होगी.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. इनमें जनगणना को लेकर अहम फैसले लिए गए. बैठक में इस प्रकिया के लिए बजट को मंजूरी दी गई. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया है.
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जनगणना 2027 इस सीरीज़ की सोलहवीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी. उन्होंने कहा कि, जनगणना 2027 पहली डिजिटल जनगणना होगी. जनगणना का डिजिटल डिजाइन डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
भारत की जनगणना दो फेज में की जाएगी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय जनगणना दुनिया की सबसे बड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव और स्टैटिस्टिकल एक्सरसाइज है. भारत की जनगणना दो फेज में की जाएगी. पहला, हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस– अप्रैल से सितंबर, 2026 और दूसरा, पॉपुलेशन एन्यूमरेशन (PE) – फरवरी 2027 (UT लद्दाख और यूटी जम्मू और कश्मीर के बर्फ से ढके नॉन-सिंक्रोनस इलाकों और हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के लिए, पॉपुलेशन एन्यूमरेशन सितंबर, 2026 में की जाएगी).
लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारी देश के लिए जरूरी इस बड़े काम को पूरा करेंगे. डेटा इकट्ठा करने के लिए मोबाइल ऐप और मॉनिटरिंग के लिए सेंट्रल पोर्टल का इस्तेमाल करने से बेहतर क्वालिटी का डेटा मिलेगा. डेटा का फैलाव बहुत बेहतर और यूजर-फ्रेंडली तरीके से होगा ताकि पॉलिसी बनाने के लिए जरूरी पैरामीटर पर सभी सवाल एक बटन क्लिक करते ही मिल जाएं.
जनगणना 2027 देश की 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना होगी. जनगणना गांव, शहर और वार्ड लेवल पर प्राइमरी डेटा का सबसे बड़ा सोर्स है, जो घर की हालत, सुविधाएं और संपत्ति, डेमोग्राफी, धर्म, SC और ST, भाषा, साक्षरता और शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, माइग्रेशन और फर्टिलिटी जैसे अलग-अलग पैरामीटर पर माइक्रो लेवल डेटा देती है. सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990, सेंसस करने के लिए कानूनी फ्रेमवर्क देते हैं.










