बांग्लादेश की अदालत का बड़ा फैसला, अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा, मानवता के विरुद्ध अपराध का ठहराया दोषी

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ढाकाः बांग्लादेश की एक अदालत ने सोमवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनायी है. उन्हें मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी ठहराया गया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, महीनों तक चले मुकदमे में उन्हें पिछले वर्ष छात्रों के नेतृत्व में हुए विद्रोह पर घातक कार्रवाई का आदेश देने का दोषी पाया गया.

सीना को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) ने यह सजा सुनाई. उन्हें पहले अदालत ने भगोड़ा घोषित किया था. ढाका में कड़ी सुरक्षा वाली अदालत में फैसला पढ़ते हुए, न्यायाधिकरण ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के यह साबित कर दिया है कि पिछले साल 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर घातक कार्रवाई के पीछे हसीना का हाथ था.

हसीना को निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल प्रयोग का आदेश देने, भड़काऊ बयान देने और ढाका तथा आसपास के क्षेत्रों में कई छात्रों की हत्या के लिए कार्रवाई को अधिकृत करने के लिए मौत की सजा दी गई.

बता दें कि जुलाई 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विद्रोह ने शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया. 5 अगस्त, 2024 को वह भागकर भारत आ गईं और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार जुलाई के विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे.

शेख हसीना प्रशासन ने पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए मानवता के विरुद्ध अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की स्थापना की थी. इस न्यायाधिकरण ने पहले हसीना के कार्यकाल के दौरान युद्ध अपराधों के आरोपी जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं पर मुकदमा चलाया था.

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Author: News 7

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