श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में उधमपुर और चेनानी सुरंग के बीच झाखेनी और थराड़ इलाके में पिछले महीने हुए भूस्खलन के कारण 250 मीटर लंबा हिस्सा अभी भी मलबे में दबा हुआ है, जिससे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से बंद पड़ा है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में मौके का दौरा करते हुए कहा था कि सड़क को पूरी तरह से बहाल करने में अभी 20-25 दिन और लग सकते हैं.
बंद राजमार्ग के कारण सेब, नाशपाती और आड़ू जैसे नाशवंत फलों की ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. सैकड़ों ट्रक काजीगुंड (कुलगाम जिले) में दो हफ्तों से फंसे हैं और उनमें लदे फल अब सड़ने लगे हैं.

मुगल रोड से भी राहत नहीं
कश्मीर को जम्मू से जोड़ने वाली वैकल्पिक मुगल रोड को केवल हल्के वाहन और छह टायर वाले ट्रकों के लिए खोला गया है. इससे भारी ट्रकों की आवाजाही रुक गई है. सोपोर फल विक्रेता एवं उत्पादक संघ के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक ने बताया, “10, 12 और 14 टायर वाले ट्रकों की आवाजाही रुकने से फल मंडियों में बड़ी मात्रा में सेब खराब हो रहा है. करीब 1200 से 1500 ट्रक हाईवे पर फंसे हैं.”उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो सिर्फ सोपोर फल मंडी को ही ₹150 से ₹200 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है.
कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर भारी असर
कश्मीर की बागवानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. घाटी में हर साल 20-25 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है, जो देश के कुल सेब उत्पादन का 78% है और करीब 35 लाख लोगों की आजीविका इसी से जुड़ी है.
कश्मीर फल विक्रेता संघ के अध्यक्ष बशीर अहमद बशीर ने कहा, “हर साल बागवानी क्षेत्र से कश्मीर को करीब ₹15,000 करोड़ की आमदनी होती है. इस बार अगर रास्ता जल्द नहीं खुला, तो सेब उद्योग को ₹500 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है.”

सेब उत्पादकों की हालत बदतर
शोपियां जिले के अब्दुल अहमद भट, जिन्होंने चार साल पहले हाई-डेंसिटी सेब की खेती शुरू की थी, ने कहा कि उनका पूरा उत्पादन सड़ जाएगा अगर भारी ट्रकों को मुगल रोड से गुजरने की अनुमति नहीं मिली.
पूर्व पीडीपी विधायक ऐजाज मीर ने कहा कि बागवानों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है. “बाजार में अब सेब की खरीद बंद हो चुकी है और जो व्यापारी खरीद भी रहे हैं, वे सामान्य कीमत से 60% कम दर पर खरीद रहे हैं. इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.”










