नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पीएम मोदी ने अपने लंबे राजनीतिक सफर और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।
उन्होंने अपने सफर को एक पाठशाला बताते हुए कहा कि जिसने उन्हें जिताया, उसने विनम्र होना सिखाया। वहीं, जिसने उन्हें गिराया, उसने फिर से उठकर खड़ा होना सिखाया।
पीएम मोदी ने कहा, “शुभचिंतकों ने मुझे प्रोत्साहित किया और आलोचकों ने मुझे अपने भीतर झांकना सिखाया। जिन्होंने मेरा साथ दिया उन्होंने मुझे विश्वास की ताकत दिखाई और जिन्होंने विरोध किया उन्होंने मुझे लोकतंत्र की शक्ति समझाई“।
पीएम ने विभिन्न चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि हर संकट उनके धैर्य की परीक्षा रहा है, जबकि हर सफलता ने उनकी जिम्मेदारी की भावना को और गहरा किया है।
उन्होंने याद किया कि भुज के भूकंप ने उन्हें पुनर्निर्माण में डटे रहना सिखाया, चंद्रयान ने असफलता के बाद फिर उठना सिखाया और कोविड-19 महामारी ने देश की सामूहिक चेतना की ताकत का अहसास कराया।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासी ही उनके लिए ईश्वर का रूप हैं और भाजपा कार्यकर्ता उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने देशवासियों के इस 25 साल के भरोसे को राष्ट्र की संपत्ति बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि आज वे जिस भी भूमिका में हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान ‘जनता जनार्दन’ का ही है। यह 25 साल का जनविश्वास और अनुभव देश की एक बहुत बड़ी पूंजी है।









