नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवाओं से कहा कि सवाल पूछना लोकतंत्र का अहम हिस्सा है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन सवाल व्यवस्था को बाधित करने के लिए नहीं बल्कि उसे बेहतर बनाने के लिए होने चाहिए।
उपराष्ट्रपति शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में आयोजित तीसरे अरुण जेटली मेमोरियल डिबेट के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “बिना सवाल पूछे लोकतंत्र नहीं हो सकता। लेकिन जहां जरूरी हो, वहां सवाल पूछे जाने चाहिए, बाधा डालने के लिए नहीं, बल्कि विकास के लिए।”
उन्होंने युवाओं से स्वतंत्र सोच विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी का समर्थन करने से पहले यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि इससे समाज और देश को क्या लाभ होगा। अगर युवाओं में ऐसी सोच विकसित होती है तो भारत 2047 से पहले विकसित देश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल सहमति का नाम नहीं है बल्कि असहमति भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है, जब अलग-अलग विचारों और मतभेदों पर तर्क, प्रमाण और संवाद के जरिए चर्चा की जाती है।
SRCC के 100 वर्ष पूरे होने पर उपराष्ट्रपति ने कॉलेज को बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी संस्थान के लिए एक सदी केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि यह उसके चरित्र और मूल्यों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि संस्थान तभी लंबे समय तक मजबूत बने रहते हैं, जब वे अपने मूल्यों से जुड़े रहते हुए बदलते समय के अनुसार खुद को लगातार विकसित करते हैं।









