देहरादून: उत्तराखंड में मॉनसून दस्तक दे चुका है। मॉनसून उत्तराखंड में सिर्फ सुहाना मौसम ही नहीं लेकर आता, बल्कि आसमानी आफत भी लेकर आता है। हर साल मॉनसून सीजन में उत्तराखंड को बादल फटने और लैंडस्लाइड समेत बाढ़ जैसे प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है।इन्हीं सब आशंकाओं को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग काफी समय से मॉनसून की तैयारियों में जुटा था। इसी के लिए कल 2 जुलाई को 13 जिलों के 66 स्थानों पर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।
दो जुलाई को होने वाली मॉक ड्रिल से पहले राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) देहरादून में 30 जून को टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। टेबल टॉप एक्सरसाइज में बताया गया कि मॉक ड्रिल के दौरान तमाम विभागों और जिलों के संभावित आपदा परिदृश्यों जैसे बाढ़, क्लाउडबर्स्ट, अतिवृष्टि, नदियों और नालों के उफान के साथ ही भूस्खलन के आधार पर अपनी कार्ययोजना, आपसी समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली का अभ्यास किया जाएगा। दो जुलाई को होने वाली मॉक ड्रिल का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी निरीक्षण करेंगे।
टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान रेखीय विभागों की तैयारियों को परखा गया। साथ ही राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से पूछा गया कि अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, मानव-वन्यजीव संघर्ष की सूचना प्राप्त होने पर क्या किया गया। किस तरह राहत और बचाव कार्य संचालित किए गए किन-किन उपकरणों का उपयोग किया गया. गोताखोर, जल पुलिस, जेसीबी, बोट और राफ्ट आदि के परिचालन पर भी विमर्श हुआ। राहत शिविरों में रेस्क्यू किए गए लोगों के लिए क्या-क्या व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं. इन सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अभ्यास के जरिए संभावित कमियों और चुनौतियों की पहचान कर उनका समय रहते समाधान किया जाएगा, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी, समन्वित और त्वरित रूप से संचालित किए जा सकें।









