नई दिल्ली : इंडिगो ने अपने विमान यात्रियों के साथ पिछले सात दिनों में जो कुछ किया है, उसको लेकर सरकार सख्त है. सरकार ने 48 घंटे के भीतर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है. विमानन मंत्रालय ने कहा है कि क्यों नहीं कंपनी और सीईओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. हालांकि, कंपनी ने कहा है कि वह जल्द से जल्द स्थिति को सामान्य करने की ओर बढ़ रही है.
इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के बोर्ड ने संकट प्रबंधन समूह (सीएमजी) का गठन किया है. यह हालात की निगरानी के लिए नियमित रूप से बैठक कर रहा है. इंडिगो ने पूरी व्यवस्था के लिए अनएक्सपेक्टेड ऑपरेशनल चैलेंजेज को जिम्मेदार ठहराया है. इनमें तकनीकी गड़बड़ियां, मौसम, शेड्यूल में बदलाव और भीड़भाड़ शामिल हैं. हालांकि, एक्सपर्ट मानते हैं कि सबसे अधिक मार नए ड्यूटी रोस्टर से हुई.
कुछ दिन पहले ही डीजीसीए ने उड़ान ड्यूटी समय सीमा (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी एफडीटीएल) को लेकर दिशानिर्देश जारी किया था. इसके तहत पायलट के लिए आराम और ड्यूटी घंटे के नियमों में बदलाव किया गया था. लेकिन उसके बाद जिस तरीके से संकट बढ़ता गया, सरकार को तत्काल प्रभाव से इसे वापस लेना पड़ा. ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सरकार ने बिना तैयारी के ही नए नियम लागू कर दिए थे ? क्या उन्होंने विमान कंपनियों से बातचीत नहीं की थी ? क्या उन्होंने विकल्पों पर विचार नहीं किया था ? क्या सरकार को अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी समस्या सामने आ सकती है ?
इंडिगो का कहना है कि डीजीसीए के नए निर्देशों के अनुसार पायलटों के लिए छुट्टी ग्रांट करना अनिवार्य हो गया. लिहाजा पायलट की संख्या को लेकर संकट बढ़ गया. कंपनी ने कहा कि 26 अक्टूबर को एयरलाइन ने विंटर सीजन की वजह से उड़ानों की फ्रीक्वेंसी बढ़ा दी थी. इसलिए पैसेंजर की संख्या बढ़ गई, जबकि दूसरी ओर उन्हें पायलट को छुट्टी देने का दबाव आ गया. इस कारण से एक बड़ा गैप बना. ऊपर से एयरबस ए320 के सॉफ्टवेयर संबंधी एडवायजरी जारी हो गई.
डीजीसीए ने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए चार सदस्यों का एक पैनल तैयार किया है. इसमें डीजीसीए के संयुक्त डायरेक्टर स्तर के अधिकारी संजय के. ब्रम्हाने और डिप्टी डायरेक्टर जनरल अमित गुप्ता, सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर कैप्टन कपिल मांगलिक और फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर कैप्टन रामपाल शामिल हैं. कमेटी 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.










