दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत-रूस के बीच हुए कई समझौतों का आदान-प्रदान किया. इस दौरान दो अहम समझौतों पर साइन हुए- पहला, कोऑपरेशन और माइग्रेशन पर समझौता और दूसरा, अस्थायी श्रमिक गतिविधियों से जुड़ा समझौता. ये समझौते दोनों देशों के आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं.
पीएम मोदी ने कहा, “पंद्रह साल पहले, 2010 में, हमारी साझेदारी को विशेष विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था. पिछले ढाई दशकों से पुतिन ने अपने नेतृत्व और दूरदर्शिता से इस रिश्ते को पोषित किया है. हर परिस्थिति में उनके नेतृत्व ने हमारे संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. मैं अपने मित्र, राष्ट्रपति पुतिन के प्रति इस गहरी मित्रता और भारत के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं.”
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन का बयान:
“मैं रूसी प्रतिनिधिमंडल को दिए गए गर्मजोशी भरे और आतिथ्यपूर्ण स्वागत के लिए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, भारत के प्रधानमंत्री और हमारे सभी भारतीय सहयोगियों को धन्यवाद देता हूं…मैं कल अपने आवास पर आयोजित रात्रिभोज के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता हूं. हम बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ईंधन की निर्बाध आपूर्ति जारी रखने के लिए तैयार हैं. हमारे देश धीरे-धीरे भुगतान निपटान के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग की ओर बढ़ रहे हैं. वाणिज्यिक भुगतानों में यह हिस्सेदारी पहले से ही 96 प्रतिशत है. पिछले वर्ष, विभिन्न आँकड़ों के अनुसार, हमारे द्विपक्षीय व्यापार में 12% की वृद्धि हुई है, जिसने एक और कीर्तिमान स्थापित किया है. यह संख्या अलग दिख सकती है, लेकिन सामान्यतः यह लगभग 64 अरब अमेरिकी डॉलर है. वर्तमान में, हमारा अनुमान है कि इस वर्ष के परिणाम उसी प्रभावशाली स्तर पर बने रहेंगे. साथ ही, जैसा कि मैं समझता हूँ, हम इस संख्या को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुँचाने के लिए तैयार हैं… प्रधानमंत्री ने हमें चुनौतियों की एक पूरी सूची दी है जिन पर हमारी सरकार को सबसे अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है. हम ऐसा करेंगे. भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच एक मुक्त व्यापार क्षेत्र के निर्माण से रूस-भारत वाणिज्यिक संबंधों के विकास में मदद मिलेगी. हम इसी समझौते पर पहले से ही काम कर रहे हैं. हम सबसे बड़े भारतीय परमाणु संयंत्र के निर्माण की परियोजना पर भी काम कर रहे हैं. छह में से तीन रिएक्टर पहले ही ऊर्जा नेटवर्क से जुड़ चुके हैं. हम अपने भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर नए अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्ग बनाने पर काम कर रहे हैं, जिसमें रूस या बेलारूस से हिंद महासागर तट तक उत्तर-दक्षिण परिवहन बनाने की परियोजना भी शामिल है. रूस और भारत ब्रिक्स, एससीओ और वैश्विक बहुमत के अन्य देशों में समान विचारधारा वाले देशों के साथ स्वतंत्र और आत्मनिर्भर विदेश नीति का संचालन कर रहे हैं… हम संयुक्त राष्ट्र में निहित कानून के मुख्य सिद्धांत की रक्षा कर रहे हैं.”
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी का बयान:
पीएम मोदी ने कहा, “भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए हमने 2030 तक के आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर सहमति व्यक्त की है. भारत ने शुरू से ही यूक्रेन मुद्दे पर शांति की वकालत की है। हम इस मामले के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं। भारत हमेशा से अपना योगदान देने के लिए तैयार रहा है और भविष्य में भी रहेगा. भारत और रूस यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ शीघ्र मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए काम कर रहे हैं. भारत और रूस लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. चाहे पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला हो या क्रोकस सिटी हॉल पर कायरतापूर्ण हमला, इन सभी घटनाओं की जड़ एक ही है. भारत का दृढ़ विश्वास है कि आतंकवाद मानवता के मूल्यों पर सीधा हमला है और इसके खिलाफ वैश्विक एकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है. भारत और रूस संयुक्त राष्ट्र, जी-20, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन और अन्य मंचों पर घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं. हम इन सभी मंचों पर अपनी बातचीत और सहयोग जारी रखेंगे. इस वर्ष अक्टूबर में, लाखों श्रद्धालुओं ने कलमीकिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध मंच में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का आशीर्वाद प्राप्त किया. मुझे खुशी है कि हम जल्द ही रूसी नागरिकों के लिए 30-दिवसीय निःशुल्क ई-पर्यटक वीजा और 30-दिवसीय समूह पर्यटक वीज़ा शुरू करने जा रहे हैं.”










