ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स कानून 2021 के कई नियम रद्द, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से मोदी सरकार को लगा झटका

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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स कानून 2021 के कई नियमों को रद्द कर दिया. ये नियम अलग-अलग ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों से जुड़े थे. अदालत के इस फैसले से मोदी सरकार को झटका लगा है.

चीफ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहाकि केंद्र ने इन नियमों को मामूली बदलावों के साथ फिर से लागू किया था. बेंच ने आगे कहाकि जिन नियमों पर सवाल उठाए गए हैं. वे नियम शक्तियों के बंटवारे और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, और उन्हें वापस नहीं लाया जाना चाहिए था.

बेंच ने ये भी साफ किया कि लंबित मामलों से निपटना सिर्फ न्यायपालिका की जिम्मेदारी नहीं है, और यह जिम्मेदारी सरकार के दूसरे अंगों को भी उठानी चाहिए. कोर्ट ने कार्यकाल पर पहले के न्यायिक निर्देशों को बहाल कर दिया. इससे यह साफ हो गया कि इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल और कस्टम्स, एक्साइज और सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के सदस्य 62 साल की उम्र तक सेवा में बने रहेंगे. वहीं उनके चेयरपर्सन या प्रेसिडेंट 65 साल की आयु तक पद पर बने रहेंगे.

ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021: ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021, अप्रैल 2021 में जारी किए गए ऐसे ही एक ऑर्डिनेंस की जगह लेगा. इसमें 8 ट्रिब्यूनल को खत्म करने की कोशिश की गई थी. ये ट्रिब्यूनल अलग-अलग कानूनों के तहत विवादों की सुनवाई के लिए अपील करने वाली संस्थाओं के तौर पर काम करते थे. साथ ही अपने काम मौजूदा न्यायिक फोरम जैसे सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट को ट्रांसफर कर देते थे.

यह एक्ट फिल्म सर्टिफिकेशन अपील ट्रिब्यूनल जैसे कई अपील करने वाले ट्रिब्यूनल को खत्म कर देता है और उनके काम हाईकोर्ट या सिविल कोर्ट को ट्रांसफर कर देता है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) या किसी नॉमिनी की हेडिंग वाली एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी, चेयरपर्सन और मेंबर के लिए अपॉइंटमेंट की सिफारिश करती है.

 यह एक्ट ट्रिब्यूनल मेंबर्स की क्वॉलिफिकेशन, अपॉइंटमेंट, टेन्योर और हटाने के प्रोविज़न को फाइनेंस एक्ट, 2017 से हटाकर एक साथ लाता है.

कई सेक्टर में ट्रिब्यूनल के एनालिसिस से जरूरी नहीं कि न्याय तेजी से मिले और इनसे सरकारी खजाने पर भी काफी खर्च होता है। इसी वजह से ट्रिब्यूनल के काम करने के तरीके को सही करने का फैसला लिया गया, यह प्रोसेस 2015 में शुरू हुआ था.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश में ट्रिब्यूनल के काम करने के तरीके पर अपनी नाराजगी जाहिर की, क्योंकि इनमें से कई जरूरी क्वासी-ज्यूडिशियल बॉडी में स्टाफ की कमी है. भारत में अब 16 ट्रिब्यूनल हैं, जिनमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, आर्म्ड फोर्सेज अपीलेट ट्रिब्यूनल, डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल वगैरह शामिल हैं. इनमें भी बहुत ज़्यादा खाली जगहें हैं.

ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट ने 9 मुख्य ट्रिब्यूनल को खत्म कर दिया. इससे न्यायिक आजादी और मुख्य ट्रिब्यूनल के सदस्यों की अपॉइंटमेंट, सर्विस की शर्तों, सैलरी के मामले में सरकार के अधिकार को बड़ा खतरा था.

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Author: News 7

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