नई दिल्ली: RJD सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब भ्रष्टाचार मामले में आज राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय करने का आदेश टाल दिया. विशेष सीबीआई अदालत अब 4 दिसंबर को यह फैसला सुनाएगी कि मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों पर आरोप तय किए जाएं या नहीं. कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था.
सीबीआई की विशेष अदालत के इस फैसले से लालू परिवार और अन्य आरोपियों की मुश्किलें फिलहाल बरकरार हैं. कोर्ट ने आरोप तय करने के आदेश को स्थगित करते हुए अगली सुनवाई के लिए 4 दिसंबर की तारीख निर्धारित की है. इस दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा शुरू किया जाएगा या नहीं. CBI ने इस मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राज्यसभा सांसद मीसा भारती, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और कई अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए हैं.
आज सुनवाई के दौरान लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पेश नहीं हुए. तीनों की ओर से पेश वकील मनिंदर सिंह ने तीनों की आज कोर्ट में पेशी से छूट की मांग की जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया. बता दें कि लालू यादव ने इस मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक की मांग के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.
लालू यादव की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में अभियोजन चलाने के लिए जरुरी अनुमति नहीं ली गई. ऐसे में पूरी जांच ही गैरकानूनी है. बिना जरुरी अनुमति के जांच शुरु नहीं की जा सकती है. सिब्बल ने कहा कि इस मामले में पूरी कार्यवाही ही गलत है. सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि लालू यादव की ओर से जानबूझकर ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने पर दलीलें नहीं रखी जा रही है.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 7 अक्टूबर 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. सीबीआई ने 7 जून 2024 को इस मामले में अंतिम चार्जशीट दाखिल किया था जिसमें 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इन 78 आरोपियों में से रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल हैं.
सीबीआई का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के ग्रुप ‘डी’ पदों पर नौकरी देने के बदले उम्मीदवारों से या उनके परिवार के सदस्यों से पटना में अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की कंपनी के नाम पर कथित तौर पर कम कीमत पर जमीनें लिखवा ली थीं. एजेंसी का दावा है कि ये नियुक्तियां बिना किसी विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना के की गईं. लालू यादव और उनके परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है.










