मुंबई: केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा है कि, भारतीय जनता पार्टी को महाराष्ट्र में किसी की सहारे या बैसाखियों की जरूरत नहीं है. वो अपनी ताकत पर आगे बढ़ेगी. उनके इस बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने पलटवार किया है.
संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में बीजेपी दो बैसाखी पर है. उन्होंने आरोप लगाया कि, भाजपा की नीति रही है कि बैसाखी लो, इस्तेमाल करो और फेंक दो. संजय राउत ने कहा है कि भाजपा की नीति है कि कूबड़ और सीढ़ी का इस्तेमाल करो और जरूरत खत्म होने पर उसे फेंक दो. उन्होंने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में भाजपा पर जमकर निशाना साधा.
संजय राउत ने भाजपा पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि, बीजेपी को लोकसभा और विधानसभा में अपनी जरूरत के हिसाब से ढिंढोरा पीटना पड़ता है और जब जरूरत खत्म हो जाती है, तो वो आत्मनिर्भरता का नारा देती है. अब बीजेपी को अजित पवार की जरूरत है.
उन्होंने कहा, बीजेपी के पास महाराष्ट्र में पोस्टर लगाने के लिए कार्यकर्ता नहीं थे. जब उसने पहले चुनाव में हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेना के साथ गठबंधन किया था, तब इस महाराष्ट्र में बीजेपी को कोई जानता तक नहीं था. लेकिन बालासाहेब ठाकरे ने शिवसैनिकों को हिंदुत्व के मुद्दे पर राजी कर लिया.
अमित शाह के बयान पर गौर करते हुए संजय राउत ने कहा, “आदेश दिया गया था कि हमें भाजपा के साथ जाना चाहिए. अगर हमने आपको ढील नहीं दी होती, तो आपका क्या होता.” उन्होंने आरोप लगाया कि, अमित शाह एक व्यवसायी के रूप में राजनीति में प्रवेश किया है.
संजय राउत ने कहा कि,”जब बीजेपी महाराष्ट्र में आई तो उनके पास पोस्टर लगाने वाले लोग नहीं थे. बाबरी के बाद हम देश भर में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में 62 जगहों पर लोकसभा चुनाव लड़ने वाले थे. बालासाहेब ठाकरे की लहर थी. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने बालासाहेब से चुनाव न लड़ने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि, आडवाणी ने बालासाहेब से विनती की थी कि, वे अपने उम्मीदवार वापस ले लें.
संजय राउत ने कहा कि , अमित शाह राजनीति में बहुत देर से आए. वे एक व्यापारी के रूप में आए. उन्हें समाज या देश के कल्याण की कोई परवाह नहीं थी. उन्होंने आरोप लगाया कि, शाह ने भाजपा में एक व्यापारी-दिमाग वाली पीढ़ी तैयार की है. उन्होंने अपने बेटे को क्रिकेट में उतारा और अब वे पारिवारिक झगड़ों की बात कर रहे हैं. राउत ने कहा कि, पारिवारिक झगड़ों की शुरुआत अमित शाह से होती है.
संजय राउत ने कहा कि, इस देश में लोकतंत्र है. अमित शाह लोकतंत्र के मालिक या सर्वोच्च नेता नहीं हैं. राउत ने कहा कि, विपक्ष को खत्म करने के लिए उन्हें वह दूरबीन ढूंढनी होगी. संजय राउत ने कहा कि, एक समय ऐसा आएगा जब लोग दूरबीन से भी भाजपा को नहीं देख पाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, शाह के यह कहने के बाद कि हम महाराष्ट्र में किसी के सहारे से नहीं चल रहे हैं, उसके बाद अगर अजित पवार और शिंदे में थोड़ा भी स्वाभिमान है, तो उन्हें सरकार छोड़ देनी चाहिए.










