अयोध्या में आज नौवें दीपोत्सव 2025 की धूम है. राम की पैड़ी सहित 56 घाटों पर एक साथ 26 लाख 17 हजार 215 दीये जलाए गए हैं. इसी के साथ नया विश्व कीर्तिमान भी बन गया है. इसके अलावा सरयू तट पर 2128 अर्चकों ने महाआरती की. यह भी गिनीज बुक में दर्ज हुआ. वहीं 1100 ड्रोन के जरिए विशेष शो भी हुआ. साकेत महाविद्यालय से झांकियों और शोभायात्रा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. सीएम योगी ने शोभायात्रा का रथ भी खींचा. उन्होंने हेलीकॉप्टर से उतरे राम-लक्ष्मण और सीता का स्वागत किया.

रिचर्ड स्टेनिंग बोले- हमने अद्भुत प्रदर्शन देखा, यह अविश्वसनीय है
अयोध्या में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 2 नए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक रिचर्ड स्टेनिंग ने एएनआई से कहा कि हमने आज अद्भुत प्रदर्शन देखा. 26,17,215 तेल के दीये जलाए गए. हर साल यह संख्या बढ़ती जा रही है. यह अविश्वसनीय है.
सीएम योगी बोले- भारत एक रहेगा तो श्रेष्ठ रहेगा
कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रतीक है. भारत एक रहेगा तो श्रेष्ठ रहेगा. इससे दीपोत्सव के इस कार्यक्रम को हर त्यौहार पर आयोजित करने का मौका मिलेगा. इससे कोई आस्था को अपमानित नहीं कर पाएगा. दीपोत्सव कुम्हार और प्रजापति जाति के लोगों के परिश्रम का परिणाम है. विपक्ष नहीं चाहता था कि इन्हें काम दिया जाए.
सीएम योगी बोले- रामद्रोहियों को अच्छा नहीं लग रहा अयोध्या का दीपोत्सव
अयोध्या में 26 लाख 17 हजार 215 दीप जलाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया. वहीं सरयू के तट पर 2100 अर्चक एक साथ मां सरयू की महाआरती कर दूसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अयोध्या के नाम दर्ज करा दिया. दीपोत्सव में अवध विश्वविद्यालय सहित महाविद्यालय व सामाजिक संगठनों से जुड़े 32 हजार स्वयंसेवकों की मेहनत रंग लाई है. बीते 17 अक्टूबर से 56 घाटों पर 28 लाख से अधिक दीपों को बिछाए जाने का कार्य पूरा हुआ था. रविवार की देर शाम 15 मिनट में सभी दीये रोशन हो गए.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी स्वयंसेवकों को इस पल की बधाई देते हुए कहा कि जो लोग आस्था का अपमान करते थे, जिन लोगों ने अयोध्या की गलियों को राम भक्तों और कार सेवकों की शरीर को छलनी कर खून से लाल किया था, आज उनको अयोध्या के यह दीपोत्सव का कार्यक्रम भी अच्छा नहीं लग रहा है. रामद्रोहियों को अयोध्या का दीपोत्सव कैसे अच्छा लग सकता है.
सीएम योगी ने आगे कहा कि जो लोग प्रदेश की सत्ता में रहते हुए दीपोत्सव का, रंग उत्सव का या देव दीपावली के कार्यक्रम से कोसों दूरी बनाए रखते थे, लेकिन प्रदेश के खजाने को सैफई महोत्सव और कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल पर खर्च करते थे.










