ओवैसी ने की धर्मांतरण विरोधी कानून की आलोचना, कहा-संविधान का सम्मान नहीं करती बीजेपी

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एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को राजस्थान में बीजेपी सरकार द्वारा हाल ही में पारित धर्मांतरण विरोधी कानून की आलोचना की. साथ हा सत्तारूढ़ दल पर संविधान का अनादर करने का आरोप लगाया.

ओवैसी ने आगे कहा कि राजस्थान गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण निषेध अधिनियम 2025 का एक प्रावधान जिला मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति के धर्मांतरण के बारे में सार्वजनिक नोट प्रदर्शित करने का निर्देश देना लिंचिंग को आमंत्रित करने के समान है.

ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘राजस्थान का नया कानून धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाता है. अगर आप अपना धर्म बदलना चाहते हैं, तो आपको कलेक्टर साहब से अनुमति लेनी होगी और आपके नाम और तस्वीर के साथ एक सार्वजनिक नोटिस लगाया जाएगा. ऐसा नोटिस लिंचिंग को आमंत्रित करने के समान है.’
उन्होंने उक्त कानून के उन प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई. इनमें अवैध धर्मांतरण के आरोपी किसी भी व्यक्ति की संपत्ति को ध्वस्त करने और जब्त करने की अनुमति दी गई है. ओवैसी ने कहा, ‘इसके अलावा अब किसी पर भी अवैध धर्मांतरण का आरोप लगाया जा सकता है. उनके घर या पूजा स्थल को बुलडोजर से गिराया जा सकता है और उनकी संपत्ति जब्त की जा सकती है.

संविधान के पहले पन्ने पर लिखा है, ‘विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और उपासना की स्वतंत्रता लेकिन भाजपा वाले संविधान का सम्मान कहाँ करते हैं? अक्टूबर में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने राजस्थान विधान सभा द्वारा सितंबर में मानसून सत्र के दौरान पारित राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक को मंजूरी दे दी.

इससे पहले राजस्थान के मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि विधानसभा द्वारा पारित धर्मांतरण विरोधी कानून में आजीवन कारावास तक की सजा सहित कड़े प्रावधान हैं और विपक्ष के विरोध के बावजूद इसे मंज़ूरी दे दी गई. एएनआई से बात करते हुए पटेल ने कहा, ‘कांग्रेस विधायक दल में कुछ लोग थे जो इस विधेयक पर चर्चा नहीं चाहते थे. उनका विरोध निंदनीय था. विपक्ष के विरोध के बावजूद, यह विधेयक पारित हो गया.’

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नए कानून में जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है. पटेल ने आगे कहा, ‘इस कानून में 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा के कड़े प्रावधान हैं. यह कानून देश के अन्य ऐसे कानूनों का अध्ययन करने के बाद बनाया गया है.

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Author: News 7

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