शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन में तबाही मची हुई है. प्रदेश में भारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड का कहर जारी है. आलम यह है कि विभिन्न जिलों में जगह-जगह पहाड़ी दरक रही है. इन दिनों हिमाचल इतिहास की सबसे बड़ी आपदा से जूझ रहा है. दिन-प्रतिदिन मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. प्रदेश में अब तक 340 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बरसात के मौसम में अब तक 3525.37 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. इसी बीच खराब मौसम को देखते हुए 7 सितंबर तक प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश जारी किया गया है.
मंडी में लैंडस्लाइड से 7 लोगों की मौत
मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल के जंगम बाग में मंगलवार (2 सितंबर) शाम करीब 6:30 बजे पहाड़ी से अचानक भारी लैंडस्लाइड हुई. मलबे की चपेट में आने से 2 घर जमींदोज हो गए. इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है, जिनके शव बरामद कर लिए गए हैं. 3 जेसीबी की मदद से मकान के ऊपर से मलबा हटाया गया, जिसके बाद मलबे में दबे सभी 7 लोगों को बाहर निकाला गया. शवों को निकालने के साथ ही प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन बंद कर दिया है.
भारी बारिश के चलते 7 सितंबर तक शिक्षण संस्थान बंद
हिमाचल में अभी भी बारिश से होने वाले नुकसान का खतरा टला नहीं है. प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश का दौर जारी है. ऐसे में सुरक्षा के मद्देनजर शनिवार, 30 अगस्त से प्रदेश के अधिकांश जिलों में शिक्षण संस्थान बंद हैं. इसी बीच खराब मौसम को देखते हुए प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों को 7 सितंबर तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं. शिक्षा सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं. प्रशासन की टीमें अभी भी अलर्ट मोड पर हैं.
आपदा की सबसे कठिन दौर से गुजर रहा हिमाचल: CM सुक्खू
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह
सुक्खू ने कहा है कि, “हिमाचल इतिहास की बहुत बड़ी आपदा से जूझ रहा है. इस साल मानसून सीजन में अब तक क्लाउडबर्स्ट की 45 घटनाएं हुई हैं. इसके अलावा 91 फ्लैश फ्लड और 105 बड़े भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें 161 लोगों की मौत हुई है और 40 लोग लापता हुए हैं. मानसून सीजन में सड़क हादसों में 154 लोगों की जान गई है. इस सीजन में अब तक 845 घर पूरी तरह से ध्वस्त हुए हैं, जबकि 3254 घरों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची हैं. प्रदेश में 780 से अधिक सड़कें बंद हैं. 360 पेयजल योजनाएं ठप हैं और 2274 ट्रांसफॉर्मर बंद पड़े हैं. अभी तक 3056 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है, अभी और आंकड़े दर्ज होने बाकी हैं. ये सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि दर्द और तबाही की तस्वीर है. आइए हिमाचल का साथ दें.”










