मुख्यमंत्री धामी ने किया कालाढूंगी में ‘अभिव्यंजना 5.0’ का शुभारंभ, देशभर के कवियों ने बिखेरा शब्दों का जादू

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नैनीताल : देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक वादियों में बसे ऐतिहासिक नगर कालाढूंगी में आयोजित अभिव्यंजना 5.0′ वार्षिक साहित्यिक अधिवेशन ने देशभर के साहित्य प्रेमियों को एक मंच पर ला दिया। ललित फाउंडेशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय इस साहित्यिक महाकुंभ में 400 से अधिक कवि, लेखक, साहित्यकार और युवा रचनाकार शामिल हुए। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रचेतना और नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कवि केवल शब्दों के सृजनकर्ता नहीं होते, बल्कि समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक जागरण तक साहित्यकारों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास के साथ अपने वर्षों पुराने संबंधों को याद करते हुए एक भावुक प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि शहीदों को समर्पित एक कार्यक्रम में कुमार विश्वास की प्रस्तुति ने उन्हें भावुक कर दिया था और वह पल आज भी उनकी स्मृतियों में जीवंत है।

अधिवेशन में पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली से दर्शकों को खूब हंसाया, जबकि डॉ. हरिओम पवार की ओजपूर्ण कविताओं ने राष्ट्रभक्ति का माहौल बना दिया। वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी लोकप्रिय काव्य शैली से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर सुमित्रानंदन पंत, चंद्रकुंवर बर्त्वाल, शैलेश मटियानी और गौरा पंत ‘शिवानी’ जैसे महान साहित्यकारों के योगदान को भी याद किया गया।

कालाढूंगी में ‘पंत साहित्य निवास’ बनाने का प्रस्ताव

कार्यक्रम के दौरान डॉ. कुमार विश्वास ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक अनूठा प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि देवभूमि के शांत वातावरण में कवियों और युवा साहित्यकारों के लिए एक स्थायी साहित्य साधना केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि यदि सरकार भूमि उपलब्ध कराती है तो वह अपने स्तर पर एक करोड़ रुपये का सहयोग देंगे। इस केंद्र का नाम ‘पंत साहित्य निवास’ या ‘प्रकृति निवास’ रखने का सुझाव भी उन्होंने दिया। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

‘अभिव्यंजना 5.0’ की खास बात यह रही कि इसमें स्थापित साहित्यकारों के साथ-साथ देशभर से आए सैकड़ों युवा कवियों और सोशल मीडिया के माध्यम से साहित्य को आगे बढ़ाने वाले रचनाकारों को भी मंच मिला। कार्यक्रम के दौरान समाज और साहित्य में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को ‘अभिव्यंजना सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया।

कालाढूंगी की शांत वादियों में आयोजित यह साहित्यिक महोत्सव हिंदी साहित्य, सांस्कृतिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का ऐसा संगम बना, जिसकी गूंज लंबे समय तक साहित्य जगत में सुनाई देती रहेगी।

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Author: News 7

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