संघ: उत्तराखंड महिला मंच द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस मे मंच ने 4 जनवरी के मुख्यमंत्री आवास कुश में आम जनता से बड़ी संख्या में विभिन्न सामाजिक धार्मिक और धार्मिक आश्रमों को शामिल करने की अपील की है। प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामाजिक विद्वानों और आश्रमों के मठाधीशों ने कहा कि इस मार्च में पूरी तरह से नशा और किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं की जाएगी।
उत्तराखंड महिला मंच की वकील कमला पंत ने कहा कि नए पति-पत्नी के बाद अब इस मामले की फिर से जांच की जरूरत है। यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार ने पहले भी साकीतियों के हितों को उजागर करने का प्रयास किया था और अब दो लोगों के नाम कथित रूप से सामने आने के बाद भी सरकार इस मामले में ताल-मटोल कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास महाविद्यालय के माध्यम से संपर्क करने, बुलडोजर से स्टॉक का भुगतान करने वालों पर कार्रवाई की मांग मुख्य रूप से की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वे वाली कंपनी सनावर की सुरक्षा की भी मांग कर रही है।
उत्तराखंड मानवता मंच के डॉ. रवि चोपड़ा ने कहा कि जो लोग सामने आए हैं, वे गंभीर हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई जांच नहीं की जा रही है। आम लोगों से साक्ष्य के लिए कहा जा रहा है, जबकि जांच के लिए सरकार के पास हैं, जांच करवाकर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समुदाय, जाति, धर्म, क्षेत्र से ऊपर मानवता का प्रदर्शन किया जा रहा है। मूल निवास भू विधि संघ समिति के मोहित डिमरी ने कहा कि 4 जनवरी मार्च के बाद भी सरकार ने आम लोगों की मांग नहीं उठाई तो पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। राज्यभर में बंद और छंदजाम जैसे प्रदर्शन शामिल हैं।
सी इन्वेस्टिगेशन माले के इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि इन्वेस्टिगेशन कोर्ट के जजमेंट में बार-बार की बात कही गई है। लेकिन उस दस्तावेज़ की जांच के विवरण अलग-अलग क्यों रखे गए, यह बात लोगों के गले तक कभी नहीं पहुंची। यही वजह है कि एक पूर्व बीजेपी नेता का कथित कथित बयान सामने आया है जिसके बाद लोग फिर से सड़कों पर उतर गए हैं। उन्होंने कहा कि कानून में यह व्यवस्था है कि किसी भी मामले में नए तथ्य सामने आने के बाद नई जांच की जा सकती है। इसलिए सरकार को तत्काल कार्यान्वयन के रूप में जिन लोगों का नाम सामने आया है, उनकी जांच होनी चाहिए।










